घोसी सांसद अतुल राय को विशेष न्यायाधीश एमपी एमएलए सियाराम चौरसिया की कोर्ट ने दुष्कर्म के मामले में शनिवार को बरी कर दिया। यूपी कॉलेज की पूर्व छात्रा की ओर से लगाए गए आरोपों पर कोर्ट ने 101 पेज के आदेश में कोर्ट ने कहा कि पीड़िता ने जो साक्ष्य और सबूत दिए हैं और जो बात कहीं, वह विश्वसनीय नहीं है। विवेचना, परिस्थितियों और साक्ष्य के अभाव में संदेह का लाभ देते हुए सांसद अतुल को दोषमुक्त किया जाना न्यायसंगत है।
रिहाई का आदेश नैनी कारागार और बरी होने की जानकारी लोकसभा अध्यक्ष को भी भेजी है। नैनी सेंट्रल जेल में बंद सांसद अतुल राय वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट में पेश हुए। अदालत ने अपील के मद्देनजर सांसद को एक लाख के बंधपत्र और इतनी ही धनराशि के दो जमानतदार देने को कहा है। इस दौरान अधिवक्ता अनुज यादव व दिलीप श्रीवास्तव, पिता भरत सिंह, भाई पवन सिंह और समर्थक मौजूद रहे। हालांकि दुष्कर्म पीड़िता को आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरित मामले में साजिशकर्ता के तौर पर लखनऊ के हजरतगंज थाने में दर्ज मुकदमे में अतुल राय को अभी जमानत नहीं मिली है। फिलहाल अतुल जेल में ही रहेंगे।
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मोबाइल पर बात करते अतुल राय के पिता
- फोटो : अमर उजाला
तीन साल पहले यूपी कॉलेज की पूर्व छात्रा ने लंका थाने में बसपा सांसद अतुल राय के खिलाफ दुष्कर्म सहित अन्य आरोपों में मुकदमा दर्ज कराया था। पिछले ढाई साल से अतुल राय प्रयागराज के नैनी सेंट्रल जेल में बंद है। वहीं, पिछले साल इसी अगस्त माह में दुष्कर्म पीड़िता और गवाह साथी ने नई दिल्ली स्थित सुप्रीम कोर्ट के बाहर आत्मदाह कर लिया था।
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वाराणसी कचहरी में अतुल राय के अधिवक्ता
- फोटो : अमर उजाला
कोर्ट ने कहा, राजनीतिक साजिश और पुरानी रंजिश में दर्ज कराया गया था मुकदमा सांसद अतुल राय को बरी किए जाने को लेकर कोर्ट ने कहा कि बचाव पक्ष के साक्ष्यों से यह स्पष्ट है कि पुरानी रंजिश में साजिशन अतुल राय के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया। सपा-बसपा गठबंधन प्रत्याशी घोषित किए जाने के बाद से पीड़िता के गवाह साथी ने सोशल मीडिया पर अतुल राय के खिलाफ अपशब्दों का प्रयोग शुरू कर दिया था। अतुल के पिता भरत सिंह के प्रार्थना पत्रों और उपलब्ध कराए गए साक्ष्य ऑडियो, वीडियो क्लिप, बैंक विवरण, मोबाइल काल डिटेल की तत्कालीन भेलूपुर सीओ अमरेश सिंह बघेल ने जांच की। यह तथ्य सामने आया कि अतुल राय और मुख्तार अंसारी के गुर्गे अंगद राय से पुरानी दुश्मनी है।
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सांसद अतुल राय
- फोटो : फाइल
यह भी सामने आया कि अतुल राय की रिमांड शीट पर दर्ज हस्ताक्षर और उनके खिलाफ दुष्कर्म का मुकदमा करने करने के लिए दी गई तहरीर की हैंड राइटिंग एक ही थी। इस बारे में पीड़िता और अभियोजन पक्ष कोई संतोषजनक कारण कोर्ट में नहीं पेश कर सका।
अतुल राय ने लोकसभा चुनाव के लिए 25 अप्रैल 2019 को नामांकन किया था। इसके छह दिन बाद दुष्कर्म की घटना सात मार्च 2018 दर्शाते हुए यानी कि सवा साल बाद एक मई 2019 को लंका थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया।