परंपराओं की थाती समेटे शिव की नगरी श्रावण पूर्णिमा पर खिलखिला उठी। काशीवासियों ने काशीपुराधिपति को रजत झूले पर झूला झुलाकर परंपरा निभाई। वहीं, महंत परिवार ने भी अपनी थाती0 को आगे बढ़ाया। 350 साल से चली आ रही झूलनोत्सव की नई जिम्मेदारी पूर्व महंत ने नई पीढ़ी को सौंपी। बाबा की चल प्रतिमा के पीछे चंद्रयान-3 और चंद्रमा के शिव शक्ति स्थल की झलक भी दिखी। भक्तों के बीच गलियों में राज राजेश्वर सपरिवार निकले तो हर-हर महादेव... का जयघोष हुआ।
PHOTOS: काशी में निभाई गई 350 साल की परंपरा, बाबा विश्वनाथ को झुलाया सावन का झूला, गर्भगृह पहुंची रजत प्रतिमा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Published by: किरन रौतेला
Updated Thu, 31 Aug 2023 12:31 PM IST
सार
महंत आवास से रजत पालकी पर विराजमान होकर बाबा विश्वनाथ जब काशी की गलियों में निकले तो भक्त भी भगवान को देखने के लिए उमड़ पड़े। वाचस्पति तिवारी ने दंड व मशाल लेकर पालकी यात्रा का नेतृत्व किया। हर-हर महादेव का जयघोष करते हुए भक्तों ने अपने आराध्य की अगवानी की।
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