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Pilibhit Tiger Attack: बाघ की तलाश में जुटे 'सूर्या' और 'भीम', ड्रोन से निगरानी; दूसरे दिन भी बंद रहे स्कूल

Fri, 18 Jul 2025 03:52 PM IST
मुकेश कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत Published by: मुकेश कुमार Updated Fri, 18 Jul 2025 03:52 PM IST
सार

न्यूरिया क्षेत्र में बृहस्पतिवार को महिला कृष्णा देवी को मारने के बाद महेशपुर गांव की सीमा में दिखा। इसके बाद से बाघ की कोई लोकेशन नहीं मिल सकी। बाघ चिह्न के आधार पर वन विभाग की टीमें उसकी लोकेशन तलाशने में जुटी हैं। हाथियों और ड्रोन से निगरानी की जा रही है। 

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forest department teams is searching for the tiger with the help of elephants in Pilibhit
वन विभाग की टीम हाथियों पर सवार होकर कर रही निगरानी - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

पीलीभीत के न्यूरिया थाना क्षेत्र के फुलहर, मंडरिया आदि गांवों में दहशत का पर्याय बने बाघ की तलाश जारी है। महिला को मारने के 24 घंटे बीत जाने के बाद भी उसका पता नहीं चला है। वन विभाग की टीम सूर्या और भीम नाम के हाथियों की मदद से उसकी तलाश में जुटी है। शुक्रवार की दोपहर एक बजे प्राथमिक विद्यालय विथरा में दोनों हाथियों को रोका गया। वन विभाग के कर्मचारी भी थे। हाथियों को देखने के लिए ग्रामीणों की भीड़ जमा हो गई। वन कर्मियों ने बताया कि बाघ की लोकेशन मिलते ही हाथियों को भेजा जाएगा। बताया जा रहा है कि दोपहर में वन विभाग की टीम को गांव महेशपुर के पास बाघ की लोकेशन मिली। इलाके में थर्मल ड्रोन से निगरानी की जा रही है। उधर, बाघ न पकड़ने जाने से ग्रामीणों में दहशत है। शुक्रवार को भी पांच किलोमीटर के दायरे में स्कूल बंद रहे। 

forest department teams is searching for the tiger with the help of elephants in Pilibhit
धान के खेत में बाघ - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

न्यूरिया थाना क्षेत्र में नौ जून से बाघ की दहशत शुरू हुई थी। माला रेंज के जंगल से निकले बाघ ने खेत में गन्ने की फसल में सिंचाई कर रहे किसान मुकेश कुमार को मार दिया था। इस घटना के बाद से बाघ लगातार जंगल से बाहर डेरा जमाय रहा। 15 किलोमीटर दायरे में बाघ की चहलकदमी देखी गई। लंबे समय बाद बाघ फिर पुराने रास्ते पर लौटा और 14 जुलाई को फुलहर गांव में सुबह के समय खेत पर पहुंचे किसान दयाराम को मार डाला।  

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खेत में लगाया गया जाल - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विभाग ने अनुमति लेकर बाघ को पकड़ने के प्रयास शुरू किए थे। पांच टीमें लगाने के साथ थर्मल ड्रोन से बाघ पर नजर रखी जा रही थी। फुलहर गांव के बाहरी हिस्से को जाल लगाकर सुरक्षित भी किया गया था, लेकिन विभाग बाघ को पकड़ने में सफल नहीं हो सका। बृहस्पतिवार को बाघ ने फुलहर गांव से पांच किमी दूर पहुंचकर सहजनिया गांव में महिला मीना को घायल कर दिया। इसके बाद बाघ ने मंडरिया गांव की सीमा में पहुंचकर पहले किशोर नीलेश को घायल किया। फिर महिला कृष्णादेवी को मार दिया। इन घटनाओं के बाद वन विभाग के हाथ-पैर फूल गए।

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स्कूल में खड़े दोनों हाथी - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
दूसरे दिन भी बंद रहे स्कूल 
ग्रामीणों का कहना है कि बाघ कहां बैठा हो, इसका कुछ पता नहीं है। खेती-किसानी प्रभावित हो रही है। चार से पांच लोग एक साथ होने पर ही खेतों में जा रहे हैं। हमले की घटनाओं के बाद बृहस्पतिवार को वन विभाग ने पांच किलोमीटर दायरे में पड़ने वाले सरकारी स्कूलों को बंद करा दिया। दूसरे दिन भी स्कूल बंद रहे। 
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हाथियों की मदद से बाघ की तलाश में जुटी टीम - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

बाघ को पकड़ने में अनुभवी हैं दुधवा के हाथी
मानव वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं की स्थिति पर बाघ की लोकेशन ट्रेस करने के लिए वैसे तो पीटीआर के पास भी अपने चार हाथी हैं, लेकिन वह अभी ट्रेस नहीं हो सके हैं। इसके लिए अफसरों की ओर से दुधवा के दो हाथियों की मदद लेने का निर्णय लिया गया है। दुधवा के हाथी बाघ को पकड़ने के दौरान अपनी अहम भूमिका निभाते हैं। पूर्व में कई आपरेशन में दुधवा के हाथियों की मदद ली जा चुकी है। 

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