मनुष्य के जीवों से प्रेम की अनगिनत कहानियां हैं। कभी किसान के बैल हीरा-मोती साहित्य का हिस्सा बन जाते हैं। कभी रूपहले पर्दे पर इंसान और जानवरों के प्रेम को तेरी मेहरबानियां और हाथी मेरे साथी फिल्म के जरिए व्यक्त किया जाता है।
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अनोखी यारी: भाषा नहीं, सिर्फ मोहब्बत समझते हैं दयाराम और बत्तख बादल, घर की दुलारी, रात को करती है चौकीदारी
Sat, 23 Sep 2023 03:10 PM IST
Dimple Sirohi
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरनगर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरनगर
Published by: Dimple Sirohi
Updated Sat, 23 Sep 2023 03:10 PM IST
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किसान दयाराम और बादल बत्तख
- फोटो : Amar Ujala
किसान दयाराम और बादल बत्तख
- फोटो : Amar Ujala
कूकड़ा में मंडी से आगे निकलते ही मुख्य मार्ग पर दयाराम वाल्मीकि का घर है। बुजुर्ग के घर में चहलकदमी करती नर बत्तख सबका ध्यान खींच रही है।
दयाराम के साथ वह सड़काें पर घूमते दिखती है। अगर दयाराम घर से निकलता है तो उसका दूर तक पीछा करती है।
दयाराम के साथ वह सड़काें पर घूमते दिखती है। अगर दयाराम घर से निकलता है तो उसका दूर तक पीछा करती है।
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किसान दयाराम और बादल बत्तख
- फोटो : Amar Ujala
शाम को अगर देरी से घर पहुंचते हैं तो बादल नाम का यह बत्तख उसका इंतजार करती रहती है। रात में उन्हीं की चारपाई के पास सोते हुए भी इसे देखा जा सकता है। दिलचस्प बात यह है कि आसपास के जानवर या कुत्ते उसे कोई नुकसान नहीं पहुंचाते हैं।
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किसान दयाराम और बादल बत्तख
- फोटो : Amar Ujala
चार साल से है परिवार का हिस्सा
बुजुर्ग दयाराम के पोते मनोज कुमार बताते हैं कि पांच साल पहले वह बत्तखों के एक जोड़े को हरिद्वार से लेकर आए थे। इनमें मादा बत्तख की मौत हो गई, जबकि दूसरा नर बत्तख उनके पास है। इसे बादल नाम से पुकारते हैं। यह पूरे मोहल्ले का दुलारा है।
बुजुर्ग दयाराम के पोते मनोज कुमार बताते हैं कि पांच साल पहले वह बत्तखों के एक जोड़े को हरिद्वार से लेकर आए थे। इनमें मादा बत्तख की मौत हो गई, जबकि दूसरा नर बत्तख उनके पास है। इसे बादल नाम से पुकारते हैं। यह पूरे मोहल्ले का दुलारा है।
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किसान दयाराम और बादल बत्तख
- फोटो : Amar Ujala
रात के समय बन जाता है चौकीदार
बादल रात के समय दयाराम की चारपाई के पास ही सोता है। अगर सड़क पर कोई व्यक्ति आता दिखाई देता है तो यह अपनी आवाज में शोर मचाने लगता है। इससे मोहल्ले में जाग हो जाती है।
मनोज बताते हैं कि बत्तख को धीरे-धीरे परिवार के सदस्यों से प्रेम हो गया, लेकिन सबसे ज्यादा यह बाबा के पास रहती है।
बादल रात के समय दयाराम की चारपाई के पास ही सोता है। अगर सड़क पर कोई व्यक्ति आता दिखाई देता है तो यह अपनी आवाज में शोर मचाने लगता है। इससे मोहल्ले में जाग हो जाती है।
मनोज बताते हैं कि बत्तख को धीरे-धीरे परिवार के सदस्यों से प्रेम हो गया, लेकिन सबसे ज्यादा यह बाबा के पास रहती है।