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खौफनाक सामूहिक हत्याकांड: सियासत में टकराया वजूद तो रची गई खूनी साजिश, फिर हुई थी इतनी बड़ी वारदात, हिल गया था पूरा जिला

Tue, 05 Jul 2022 07:13 PM IST
कपिल kapil अमर उजाला ब्यूरो, मुजफ्फरनगर
अमर उजाला ब्यूरो, मुजफ्फरनगर Published by: कपिल kapil Updated Tue, 05 Jul 2022 07:13 PM IST
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The rivalry started 17 years ago due to a clash in politics in the Muzaffarnagar mass murder case
मीनू त्यागी को ले जाती पुलिस। - फोटो : amar ujala

मुजफ्फरनगर में रोहाना गन्ना समिति के पूर्व चेयरमैन उदयवीर सिंह और चरथावल के पूर्व ब्लॉक प्रमुख रहे विक्की त्यागी पक्ष के बीच पिछले 17 साल से रंजिश चली आ रही है। ब्लॉक प्रमुख के चुनाव को लेकर शुरू हुई वजूद की लड़ाई खूनी खेल में बदल गई। खौफनाक सामूहिक हत्याकांड की साजिश रची गई, जिसमें अदालत ने फैसला सुनाया है।



साल 2005 में चरथावल ब्लॉक प्रमुख के चुनाव को लेकर दोनों पक्षों में रंजिश की नींव पड़ी थी। बधाई खुर्द के उदयवीर सिंह और बरेली जेल में बंद पावटी खुर्द के विक्की त्यागी ने चुनाव लड़ा। इस दौरान दोनों पक्षों में तनाव बनना शुरू हो गया था। चुनाव विक्रांत त्यागी उर्फ विक्की ने जीता। नया मोड़ तब आया, जब साल 2007 में उदयवीर सिंह के समर्थक बहेड़ी गांव निवासी लकड़ी के आढ़ती सतीश त्यागी की हत्या कर दी गई।

The rivalry started 17 years ago due to a clash in politics in the Muzaffarnagar mass murder case
गांव में खाली पड़ मकान। - फोटो : amar ujala

वारदात में विक्की त्यागी, मीनू त्यागी समेत अन्य नामजद किए गए थे। दोनों पक्षों के लोग साल 2010 में बधाई खुर्द में हुए झगड़े में आमने-सामने आ गए, जिसमें उदयवीर चेयरमैन के भतीजे अमरवीर और दूसरे पक्ष के मुकेश की मौत हो गई थी। इसी साल हुए चुनाव में अमरवीर की पत्नी सोनिया को ब्लॉक प्रमुख चुन लिया गया था।

The rivalry started 17 years ago due to a clash in politics in the Muzaffarnagar mass murder case
सामूहिक हत्याकांड। - फोटो : amar ujala

इस दौरान दोनों पक्षों के बीच रंजिश सुलगती रही। लेकिन किसी को खतरनाक साजिश की उम्मीद नहीं थी। करीब एक साल बाद बड़कली सामूहिक कांड को अंजाम दिया गया, जिससे जिला हिल गया था।

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The rivalry started 17 years ago due to a clash in politics in the Muzaffarnagar mass murder case
आरोपियों को ले जाती पुलिस। - फोटो : amar ujala

182 पेज पर लिखा गया फैसला
सामूहिक हत्याकांड का फैसला 182 पेज पर लिखा गया। एडीजीसी किरणपाल कश्यप ने बताया कि अदालत ने फैसला लिखते समय कड़ी टिप्पणी भी की है। मुकदमे के आरोपी बबलू उर्फ अजय शुक्ला ने जिला जज चवन प्रकाश की अदालत में प्रार्थना पत्र देकर केस को अन्य कोर्ट में ट्रांसफर कराने की गुहार लगाई थी, लेकिन जिला जज ने सुनवाई के बाद दो जुलाई को इस प्रार्थना पत्र को खारिज कर दिया था। 

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The rivalry started 17 years ago due to a clash in politics in the Muzaffarnagar mass murder case
आरोपियों को ले जाती पुलिस। - फोटो : amar ujala

वहीं पहले भी मुकदमे की सुनवाई दूसरी अदालत में कराने का प्रयास किया गया था, लेकिन प्रार्थना पत्र खारिज हो गया था। बड़कली कांड में बचाव पक्ष की ओर से अदालत में चार गवाह पेश किए गए। जबकि अभियोजन की ओर से 23 गवाह अदालत पहुंचे। इसके बाद कोर्ट ने फैसला सुनाया।

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