रामपुर तिराहा कांड की सुनवाई में आखिरी एक वर्ष बेहद महत्वपूर्ण रहा। हाईकोर्ट ने अपर जिला जज संख्या सात के पीठासीन अधिकारी शक्ति सिंह को अधिकृत किया। उन्होंने लगातार सुनवाई की। यही वजह है कि एक वर्ष में फैसला हो सका।
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जानकारी देते राजीव शर्मा, डीजीसी फौजदारी
- फोटो : अमर उजाला
एक अक्तूबर, 1994 को अलग राज्य की मांग के लिए देहरादून से बसों में सवार होकर आंदोलनकारी दिल्ली के लिए निकले थे। सात आंदोलनकारियों की मौत हो गई थी। हाईकोर्ट के आदेश पर सीबीआई ने इस मामले की जांच की। 25 जनवरी 1995 को सीबीआई ने पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए थे। पहले स्पेशल कोर्ट में सुनवाई चल रही थी।
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रामपुर तिराहा कांड में अदालत के फैसले की जानकारी दते अधिवक्ता। संवाद
उत्तराखंड संघर्ष समिति तेजी से सुनवाई के लिए हाईकोर्ट पहुंची, जिसके बाद अपर जिला एवं सत्र न्यायालय संख्या-7 के पीठासीन अधिकारी शक्ति सिंह को सुनवाई के लिए अधिकृत किया था। तीन मार्च 2023 को एक साथ 17 पुलिसकर्मी अदालत में हाजिर हुए थे। अब सोमवार को न्यायालय ने पहली पत्रावली में इंसाफ कर दिया। दोनों अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है।
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कोर्ट के फैसले के बाद रामपुर तिराहा कांड के अभियुक्तों को जेल ले जाती पुलिस। संवाद
इन महत्वपूर्ण मामलों में सुनाया फैसला
एडीजे शक्ति सिंह ने जिले के कई महत्वपूर्ण मामलों का निस्तारण किया है। महमूदनगर के चर्चित मामले में एक साथ 36 लोगों को सजा सुनाई थी। बेबी किलर शाहनवाज उर्फ प्लास्टिक के मामले की सुनवाई की। अब रामपुर तिराहा कांड में फैसला भी न्यायाधीश शक्ति सिंह ने ही दिया है।