मुजफ्फरनगर शहर के नुमाइश मैदान पर राष्ट्रीय पशु प्रदर्शनी और कृषि मेला शुरू हो गया। राष्ट्रीय पशु प्रदर्शनी में हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के पशुओं के पहुंचने का सिलसिला जारी है। केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी, केंद्रीय पशुपालन मंत्री पुरुषोत्तम रूपाला और प्रदेश के पशुपालन मंत्री धर्मपाल सिंह दोपहर में मेले का विधिवत उद्घाटन करेंगे। इस दौरान तुगलकपुर स्थित गाय अभयारण्य का शिलान्यास भी किया जाएगा।
Kisan Mela: चौकिए नहीं, उजली देती है 65 लीटर दूध, ढाई करोड़ के भैंसे, चिट्टी रेशमा ने किसानों को बनाया दीवाना
केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. संजीव बालियान ने सुबह करीब 10 बजे प्रदर्शनी में पहुंचकर पशुपालकों और किसानों से मुलाकात की। उन्होंने विभिन्न कंपनियों के स्टॉल का निरीक्षण किया।
उन्होंने बताया कि मेले के सर्वश्रेष्ठ पशु को पांच लाख रुपये का इनाम दिया जाएगा। मेले में भेड़, बकरी, घोड़ा, मुर्राह नस्ल, गिर, हरियाणा नस्ल, साहीवाल, थारपारकर नस्ल के पशु मेले में पहुंच चुके हैं। मेले में करीब 50 लाख के इनाम बांटे जाएंगे।
मुजफ्फरनगर में चल रहे किसान मेले में पानीपत से लाया गया मुर्राह नस्ल का भैंसा घोलू प्रदर्शनी में पहुंचते ही छा गया। दस करोड़ की कीमत के भैंसे के साथ सेल्फी लेने की होड़ लगी रही। नुकरी घोड़ी रेशमा की सुंदरता सबके दिलों को भाई गई।
पानीपत के डिडवाड़ी गांव से पदमश्री नरेंद्र सिंह अपने पशुओं के साथ पहुंचे। उनके भैंसे घोलू-2 को देखने के लिए पशु प्रेमियों की भीड़ जमा रही। राष्ट्रीय स्तर पर कई बार के विजेता घोलू की कीमत 10 करोड़ तक लगाई जा चुकी है।
पानीपत के डिडवाड़ी गांव से पदमश्री नरेंद्र सिंह अपने पशुओं के साथ पहुंचे। उनके भैंसे घोलू-2 को देखने के लिए पशु प्रेमियों की भीड़ जमा रही। राष्ट्रीय स्तर पर कई बार के विजेता घोलू की कीमत दस करोड़ तक लगाई जा चुकी है। करीब 16 क्विंटल वजन के भैंसे को रोजाना 10 किलो फीड दिया जाता है। आठ से 10 किमी की सैर कराई जाती है। राष्ट्रीय स्तर पर घोलू धमाल मचा चुका है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पशु प्रेमी उसके खूब दीवाने हैं।
नुकरी नस्ल की रेशमा, किंग और देवधन ने लुभाया मन
करनाल के गालिबखेड़ी से चरणजीत सिंह अपनी नुकरी नस्ल की घोड़ी रेशमा को लेकर मेले में पहुंचे हैं। रेशमा मेले में पहुंचते ही सबको भा गई। बेहद सुंदर घोड़ी अपने बीच देखकर युवाओं में फोटो खिंचवाने की होड़ देर रात तक लगी रही।
इसी तरह पंजाब के लुधियाना से यहां पहुंचे सनी नुकरी नस्ल की घोड़ी और मारवाड़ी नस्ल के घोड़े के साथ पहुंचे हैं। वह बताते हैं कि उनके नुकरी नस्ल का घोड़ा पांच साल की उम्र में 16 बार चैंपियन बन चुका है। यह बेहद शांत स्वभाव का होता है, खास बात है कि इसके शरीर पर कोई भी काला धब्बा नहीं होता है और इसकी त्वचा सफेद और गुलाबी होती है। इसे सुबह 45 मिनट दौड़ाया जाता है फिर नदी में तैराकी कराई जाती है। मारवाड़ी नस्ल का घोड़ा देवधन भी दो साल की उम्र में कई प्रतियोगिताएं जीत चुका है।