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चश्मदीदों की जुबानी: किसी ने पुलिस को बचाया तो किसी ने उग्र भीड़ को डंडे-पत्थर लेकर दौड़ाते देखा
Thu, 16 Apr 2020 09:27 AM IST
शाहरुख खान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुरादाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुरादाबाद
Published by: शाहरुख खान
Updated Thu, 16 Apr 2020 09:27 AM IST
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रास्ते में पड़ीं ईंट और पत्थर
- फोटो : अमर उजाला
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किसी ने पुलिस कर्मचारियों को हेलमेट दिया तो किसी ने थानेदार को अपने घर में बंद कर बचाया। नफरत और हिंसा के बीच इंसानियत की मिसालें भी देखने को मिलीं। अमर उजाला ने स्थानीय लोगों से घटना के बारे में पूछा तो प्रत्यक्षदर्शियों ने मानवीयता और उग्रता की कहानी अपने लफ्जों में बयां की।
राजीव कश्यप, चश्मदीद
- फोटो : अमर उजाला
पथराव से बचाव को पुलिस कर्मियों को दिए हेलमेट
बुधवार दोपहर बारह बजे का वक्त था। मैं अपने घर में ही मौजूद था। अचानक सड़क से चीख पुकार और पथराव की तेज आवाज सुना दी। मैं तेजी गेट की ओर दौड़ा। बाहर आकर देखा तो पुलिस और स्वास्थ्य कर्मियों पर महिलाएं और तमाम पुरुष पथराव कर रहे हैं। मैंने पुलिस कर्मी को अपने घर में आने को कहा। जब वह नहीं आए तो मैं भागते हुए कमरे में गया और तीन हेलमेट लेकर तुरंत बाहर आ गया। इसके बाद सिपाहियों को हेलमेट दे दिए।
राजीव कश्यप (निवासी नागफनी)
बुधवार दोपहर बारह बजे का वक्त था। मैं अपने घर में ही मौजूद था। अचानक सड़क से चीख पुकार और पथराव की तेज आवाज सुना दी। मैं तेजी गेट की ओर दौड़ा। बाहर आकर देखा तो पुलिस और स्वास्थ्य कर्मियों पर महिलाएं और तमाम पुरुष पथराव कर रहे हैं। मैंने पुलिस कर्मी को अपने घर में आने को कहा। जब वह नहीं आए तो मैं भागते हुए कमरे में गया और तीन हेलमेट लेकर तुरंत बाहर आ गया। इसके बाद सिपाहियों को हेलमेट दे दिए।
राजीव कश्यप (निवासी नागफनी)
आसिफ, चश्मदीद
- फोटो : अमर उजाला
सैकड़ों लोग हाथ में डंडे-पत्थर लेकर पुलिस की ओर दौड़ रहे थे
रामगंगा नदी की ओर जाने वाली सड़क से सैकड़ों लोग हाथों में पत्थर और डंडे लेकर पुलिस की ओर दौड़ रहे थे। लोगों के इरादे खतरनाक लग रहे थे। मैंने नागफनी एसओ सुनील कुमार से कहा कि वह तुरंत मेरे घर में आ जाएं। इसके बाद मैंने गेट बंद कर लिया। उग्र भीड़ खूब शोर-शराबा कर रही थी। हर ओर पकड़ो-मारो का हल्ला सुनाई दे रहा था। जब बाहर सड़क पर आस पड़ोस के थानों से काफी फोर्स आ गई। इसके बाद ही गेट खोला।
आसिफ (निवासी नागफनी)
रामगंगा नदी की ओर जाने वाली सड़क से सैकड़ों लोग हाथों में पत्थर और डंडे लेकर पुलिस की ओर दौड़ रहे थे। लोगों के इरादे खतरनाक लग रहे थे। मैंने नागफनी एसओ सुनील कुमार से कहा कि वह तुरंत मेरे घर में आ जाएं। इसके बाद मैंने गेट बंद कर लिया। उग्र भीड़ खूब शोर-शराबा कर रही थी। हर ओर पकड़ो-मारो का हल्ला सुनाई दे रहा था। जब बाहर सड़क पर आस पड़ोस के थानों से काफी फोर्स आ गई। इसके बाद ही गेट खोला।
आसिफ (निवासी नागफनी)
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पथराव के बाद का नजारा
- फोटो : अमर उजाला
ऐसा दिन मैंने अपनी जिंदगी में नहीं देखा था। मेडिकल टीम, पुलिस वालों और उनके वाहनों पर ईंट-पत्थर आसमान से बरस रहे थे। ऐसा लग रहा था कि आकाश से ईंट-पत्थर ओलों की तरह बरस रहे थे। भयानक पत्थरबाजी किसी के लिए भी जान लेवा हो सकती थी। मैंने कर्मचारियों को भागते देखा। कुछ लोग हाथों में डंडे लेकर उन्हें दौड़ा रहे थे।
राहुल (स्थानीय निवासी)
राहुल (स्थानीय निवासी)
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पथराव करते हुए युवा
- फोटो : अमर उजाला
आपको बता दें कि दो दिन पहले मुरादाबाद के नागफनी के नवाबपुरा इलाके में कोरोना पॉजिटिव पीतल कारोबारी की मौत के बाद बुधवार को उसके परिजनों को क्वारंटीन करने हॉटस्पॉट नवाबपुरा पहुंची पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीम पर लोगों ने पथराव कर दिया। कारोबारी के परिजन क्वारंटीन करने का विरोध करते हुए टीम से भिड़ गए और बाद में पथराव कर दिया। आसपास की छतों और गलियों से टीम पर जबरदस्त पथराव किया गया। हमले में जिला अस्पताल के डाक्टर एससी अग्रवाल, फार्मासिस्ट संजीव कुमार और ईएमटी पंकज सिंह समेत छह स्वास्थ्यकर्मी घायल हो गए। इनमें डाक्टर की हालत नाजुक बनी हुई है। हमले में कई पुलिसकर्मियों को भी चोटें आई हैं। एंबुलेंस और पुलिस जीप भी क्षतिग्रस्त कर दी गई।