पश्चिमी उत्तर प्रदेश में शनिवार को एक बार फिर मानसून सक्रिय हो गया। सुबह से मेरठ, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर और शामली समेत कई जिलों में मौसम ने करवट ली। मेरठ और आसपास के क्षेत्रों में झमाझम बारिश हुई, जबकि मुजफ्फरनगर में बूंदाबांदी और सहारनपुर के कई इलाकों में कहीं तेज बारिश तो कहीं हल्की फुहारें पड़ीं।
वेस्ट यूपी में मानसून सक्रिय: मेरठ समेत कई जिलों में झमाझम बारिश, कहीं राहत तो कहीं जलभराव और फसलों की चिंता
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में शनिवार को मानसून फिर सक्रिय हुआ। मेरठ में झमाझम बारिश से उमस से राहत मिली, जबकि मुजफ्फरनगर और सहारनपुर में बूंदाबांदी हुई। शामली में जलभराव के साथ फसलों को नुकसान की चिंता बढ़ी।
मुजफ्फरनगर में सुबह से छाए बादल, कई जगह बूंदाबांदी
मुजफ्फरनगर में शनिवार तड़के करीब पांच बजे से आसमान में बादल छा गए। सुबह आठ बजे से कई स्थानों पर बूंदाबांदी शुरू हो गई। बादल छाए रहने से मौसम का मिजाज बदला नजर आया। इससे पहले शुक्रवार को उमस भरी गर्मी से लोग परेशान रहे थे। बारिश की संभावना को देखते हुए लोगों को गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद बनी हुई है।
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सहारनपुर में कहीं तेज बारिश तो कहीं हल्की फुहार
सहारनपुर जिले में भी शनिवार सुबह मौसम अचानक बदल गया। आसमान में घने बादल छाए रहे और अलग-अलग क्षेत्रों में कहीं तेज बारिश हुई तो कहीं हल्की बूंदाबांदी। बारिश के चलते सड़कों पर आवाजाही प्रभावित हुई। दोपहिया वाहन चालकों को सबसे ज्यादा परेशानी हुई। कई लोग बारिश से बचने के लिए दुकानों और अन्य सुरक्षित स्थानों पर रुकते नजर आए। बाजारों में भी बारिश के कारण ग्राहकों की संख्या कम रही और दुकानदारी प्रभावित हुई।
शामली में बारिश से राहत, लेकिन फसलों पर बढ़ी चिंता
शामली के चौसाना और आसपास के क्षेत्रों में शनिवार को गरज-चमक के साथ तेज बारिश हुई। इससे मौसम सुहाना हो गया और लोगों को गर्मी व उमस से राहत मिली। वहीं तेज बारिश से सड़कों पर पानी भर गया और कई स्थानों पर जलभराव की स्थिति बन गई। किसानों की चिंता भी बढ़ी है। खेतों में बोई गई उड़द की फसल को नुकसान होने की आशंका है, जबकि पक चुकी धान की फसल पर भी बारिश का असर पड़ने की चिंता है। किसानों का कहना है कि खेतों में पानी अधिक देर तक जमा रहा तो तैयार फसल खराब हो सकती है।
खरीफ फसलों के लिए बारिश बनी संजीवनी
मेरठ और आसपास के इलाकों में हुई बारिश को खरीफ की फसलों के लिए लाभकारी माना जा रहा है। पर्याप्त नमी मिलने से धान की फसल को विशेष फायदा होने की उम्मीद है। इसके अलावा मक्का, बाजरा, ज्वार, अरहर, उड़द और मूंग जैसी फसलों की बढ़वार भी बेहतर हो सकती है। जिन खेतों में बुवाई के बाद पर्याप्त नमी नहीं थी, वहां बारिश से मिट्टी में नमी बढ़ेगी।
सिंचाई खर्च घटेगा, लेकिन जलभराव से बचाव जरूरी
बासमती निर्यात विकास प्रतिष्ठान के निदेशक डॉ. रितेश शर्मा के अनुसार धान की फसल के लिए इस समय पानी की विशेष आवश्यकता होती है। बारिश से किसानों को सिंचाई पर होने वाले खर्च में राहत मिल सकती है। मक्का और बाजरा जैसी फसलों के लिए भी बारिश लाभकारी है। हालांकि दलहन और निचले खेतों में अधिक समय तक पानी जमा रहना नुकसानदायक हो सकता है। इसलिए किसानों को अतिरिक्त पानी की निकासी पर ध्यान देना होगा।
आने वाले दिनों में भी बारिश के आसार
कृषि विश्वविद्यालय के मौसम वैज्ञानिक डॉ. यूपी शाही के अनुसार मानसून के सक्रिय रहने पर आने वाले दिनों में भी पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बारिश का दौर जारी रह सकता है। किसानों का कहना है कि यदि बारिश संतुलित रही और खेतों में लंबे समय तक पानी नहीं भरा तो खरीफ फसलों की बढ़वार अच्छी होगी। लगातार तेज बारिश होने की स्थिति में जल निकासी की व्यवस्था करना जरूरी होगा।