मेरठ में कंकरखेड़ा के कासमपुर रेलवे फाटक पर वंदे भारत ट्रेन की चपेट में आने से मोना (40) पत्नी नरेश व बेटी इशिका (14) और चारू (7) की मौत से पूरे परिवार में कोहराम मचा रहा। घर से लेकर मोर्चरी तक चीत्कार मचा रहा। हर कोई यही कहता रहा कि नरेश अगर कुछ देर रुक जाता तो आज परिवार नहीं उजड़ता।
पत्नी और दो बेटियों को खोने वाला नरेश रात से ही बेसुध है। उसका रो-रोकर बुरा हाल है। वहीं, मोर्चरी पर तीनों शवों का पोस्टमार्टम शुरू हुआ तो हर आंख नम हो गई। महिलाएं विलाप करते-करते बदहवास हो गईं।
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रोता बिलखता पिता
- फोटो : Amar Ujala
नरेश खुद को कोसता रहा कि अगर कुछ देर रुक जाता तो परिवार इस तरह खत्म नहीं होता। पोस्टमार्टम के बाद तीनों शवों का ब्रजघाट श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार किया गया।
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मौके पर जमा लोग
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दोनों बहनें थी पढ़ाई में तेज
चारू, इशिका की बुआ और चाची का रो-रोकर बुरा हाल है। वो बार-बार चारू और इशिका का नाम लेकर विलाप करती रहीं। बोलती रहीं कि चारू नौवीं में और इशिका पांचवीं में विद्या सागर बड़ा बाजार स्कूल में पढ़ती थीं। दोनों पढ़ने में बेहद तेज थी। कहती थीं कि पढ़-लिखकर मम्मी-पापा की गरीबी दूर करेंगी। लेकिन ऐसी घटना हो जाएगी, इसके बारे में कोई सोच भी नहीं सकता था। नरेश की मजबूरी पर हर किसी की आंख नम हो गई। लोग यही कहते रहे कि बेटा जेल में है, पत्नी और दो बेटियों की मौत का सदमा नरेश कैसे झेल पाएगा।
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मौके पर पड़े शव
- फोटो : Amar Ujala
बता दें कि नरेश चार भाइयों में तीसरे नंबर का है। बड़े भाई पप्पू की मौत हो चुकी है। दूसरे नंबर के राजू हैं। सबसे छोटे नरेश हैं। नरेश की चार बहनें हैं। परिवार के लोगों ने बताया कि पहले नरेश छोटा बाजार में रहता था, 10 दिन पहले ही यहां बड़ा बाजार में किराए पर कमरा लिया था।
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एसपी देहात
- फोटो : Amar Ujala
बेटी की बात मान लेता तो बच जाता परिवार
नरेश ने बताया कि जब वह ट्रैक पार कर रहा था तो बड़ी बेटी इशिका ने उससे रुकने के लिए कहा था। वह बोली थी कि पापा रुक जाओ, ट्रेन आ रही है। लेकिन वह नहीं रुका और हादसा हो गया। रोते हुए नरेश ने बताया कि काश मैं बेटी की बात मान लेता तो आज परिवार मेरे साथ होता। अब जिंदगी भर अकेला ही तड़पता रहूंगा।
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