बच्चों की जिद और शौक पूरा करने में अभिभावक अपने बच्चों को बाइक की नहीं, बल्कि मौत की चाबी पकड़ा रहे हैं। पिछले साल हुए हादसों में मृतकों की संख्या में बाइक चालकों की संख्या करीब 50 फीसदी से ज्यादा रही। इन मौतों में करीब 30 प्रतिशत मृतक किशोर उम्र के बाइक चालक रहे। सिलसिलेवार हादसों के बावजूद अभिभावक अपने बच्चों की सुरक्षा के प्रति नहीं सचेत नहीं हैं।
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- फोटो : amar ujala
वाहनों से प्रतिस्पर्धा किशोरों और युवाओं के लिए मौत का सबब बन रही है। अधिकांश हादसे बाइकों को तेज रफ्तार चलाने की प्रतिस्पर्धा में होते हैं, जिसमें वाहन चालक खुद के अलावा दूसरों को भी घायल कर देते हैं।
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उतार देते हैं दोपहिया वाहन के दोनों शीशे
अधिकांश दोपहिया वाहन चालक अपने वाहनों के दोनों शीशे उतार देते हैं। इससे पीछे का कुछ भी नहीं दिखाई पड़ता। बाइकों पर शीशे न लगाकर चलने वालों पर कोई कार्रवाई नहीं होती।
यदि बाइकों में शीशे हों तो दोनों ओर से बाइक चलाने वाले को कम से कम 180 डिग्री सेल्सियस तक का दिखता है। यदि बाइकों में शीशे नहीं होते तो पीछे का कुछ नहीं दिख पाता और दुर्घटना हो जाती है।
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ड्राइविंग लाइसेंस के कायदे
एआरटीओ प्रशासन प्रणव झा के अनुसार केंद्रीय मोटर यान अधिनियम 1989 के अंतर्गत 16 वर्ष से कम उम्र के किशोर किसी तरह के वाहन नहीं चला सकता है। उससे ऊपर यानी 18 की उम्र में बिना गियर वाली गाड़ी चलाने की छूट है और 18 की उम्र के बाद बाकायदा ऑनलाइन परीक्षा लेने के बाद बाइक एवं कार चलाने को ड्राइविंग लाइसेंस दिया जाता है।
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किशोरों के हाथों में बाइक देना खतरनाक
एआरटीओ ने बताया कि किशोरों के हाथों में बाइक वाकई खतरनाक है। इस पर अंकुश लगाने के लिए सख्ती बरती जाएगी और अभिभावकों को बुलाकर ही ऐसा न करने की चेतावनी भी देंगे। साथ ही यातायात पुलिस को भी किशोरों के बाइक चलाते मिलने पर सख्ती बरतने को कहा जाएगा।