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UP: दंगे की आग में झुलसने से बच गया अमन का शहर सहारनपुर, अधिकारियों ने दिखाई सूझबूझ तो दुकानदारों ने धैर्य

Sat, 11 Jun 2022 01:35 PM IST
Dimple Sirohi अमर उजाला ब्यूरो, सहारनपुर
अमर उजाला ब्यूरो, सहारनपुर Published by: Dimple Sirohi Updated Sat, 11 Jun 2022 01:35 PM IST
सार

सहारनपुर में अधिकारियों और पुलिस के समय से एक्शन में आने और अमनपसंद लोगों के प्रयास की वजह से दंगा  टल गया। जुलूस के दौरान उग्र हुई भीड़ के आगे हिंदू समाज के दुकानदारों ने धैर्य का परिचय दिया।

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UP: Saharanpur the city of peace saved from being scorched in the fire of riots
सहारनपुर हिंसा - फोटो : amar ujala
सहारनपुर में जुमे की नमाज के बाद सड़कों पर उतरे मुस्लिम समुदाय के लोगों में शामिल कुछ खुराफाती युवकों ने शहर को दंगे की आग में झोंकने के प्रयास में कोई कसर नहीं छोड़ी, लेकिन मुस्लिम समुदाय के ही अमनपसंद लोगों के प्रयास तथा प्रशासन व पुलिस अधिकारियों द्वारा सही समय पर सही एक्शन लेने की वजह से बच गया। उधर, हिंदू समुदाय के दुकानदारों ने भी धैर्य का परिचय दिया। 


शुक्रवार की दोपहर हजारों की संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोग घंटाघर पर जमा थे, जिनमें ज्यादातर 18 से 25 वर्ष की आयु के युवा नजर आ रहे थे। प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों ने उन्हें काफी समझाया। इसके बाद मंडलायुक्त लोकेश एम और आईजी डॉ. प्रीतिंदर सिंह, सिटी मजिस्ट्रेट विवेक चतुर्वेदी, सिटी मजिस्ट्रेट राजेश कुमार सहित तमाम अधिकारी भीड़ को समझाकर नेहरू मार्केट के रास्ते शहीद गंज की ओर ले जा रहे थे। इसी दौरान भीड़ उग्र हो गई।

 
UP: Saharanpur the city of peace saved from being scorched in the fire of riots
सहारनपुर हिंसा - फोटो : amar ujala

श्रीराम तिराहे तक ले जाने में प्रशासन और पुलिस बल को करीब 25 मिनट का समय लग गया, क्योंकि विरोध प्रदर्शन करने वाले लोग जाने को तैयार नहीं थे। जैसे ही भीड़ श्रीराम तिराहे पर पहुंची तो यहां खुली कुछ दुकानों में घुसकर कुछ युवकों ने सामान लूटने का प्रयास किया। कुछ दुकानदारों का सामान उठाकर दुकानों से बाहर फेंक दिया गया। दुकानों के बाहर खड़े दुपहिया वाहनों को गिरा दिया गया।


 
UP: Saharanpur the city of peace saved from being scorched in the fire of riots
सहारनपुर हिंसा - फोटो : amar ujala

भीड़ के साथ चल रहे मुस्लिम समुदाय के ही अमन पसंद लोगों ने भी उत्पात मचा रहे युवकों को रोकने का प्रयास किया, लेकिन वह सुनने को तैयार नहीं थे। ऐसे में पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा। गनीमत रही कि दोनों समुदाय के लोग आमने-सामने नहीं आए। जिससे 2014 की तरह विरोध उपद्रव में नहीं बदला।

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UP: Saharanpur the city of peace saved from being scorched in the fire of riots
सहारनपुर हिंसा - फोटो : अमर उजाला

गौरतलब है कि गुरुद्वारा रोड पर एक भूखंड को लेकर दो समुदाय के लोग आमने-सामने आ गए थे। जिसके बाद अंबाला रोड की दुकानों को आग के हवाले कर दिया गया था। दंगा भड़कने के बाद जिले भर में रिएक्शन के तौर पर आगजनी और मारपीट हुई थी, जिसके बाद प्रशासन को कर्फ्यू लगाना पड़ा था। तब भी उपद्रव करने वाले चुनिंदा ही लोग थे, लेकिन झेलना सभी समुदाय के लोगों को पड़ा था। शुक्रवार को मामला शांत होने के बाद आईजी डॉ. प्रीतिंदर सिंह ने अपने बयान में यह बात स्वीकार की है कि दुकानों में लूट का प्रयास हुआ है। 

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सहारनपुर हिंसा - फोटो : amar ujala
अमन पसंद लोगों का शहर है सहारनपुर 
सहारनपुर में बाबा लाल दास और हाजी शाह कमाल की दोस्ती की मिसाल दी जाती है, लेकिन सहारनपुर 2014 के बाद आठ साल बाद फिर दंगे की आग में झोंका जा रहा था। सांप्रदायिक सौहार्द के प्रतीक सहारनपुर को पहली नजर 1982 में लगी। मंडी थानांतर्गत चिलकाना रोड मंदिर और मस्जिद मिली हुई है।
 
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