उत्तर प्रदेश के बागपत जनपद में फिर से पलायन की चेतावनी का एक मामला प्रकाश में आया है। परिवार ने पुलिस मुठभेड़ पर सवाल उठाते हुए पलायन की चेतावनी दी है। गांव के कई लोगों ने अपने मकानों के बाहर 'मकान बिकाऊ है' के पोस्टर चस्पा किए हैं। आगे जानिए पूरा अपडेट-
यूपी में फिर उठे मुठभेड़ पर सवाल, चस्पा किए 'मकान बिकाऊ है' के पोस्टर, दी पलायन की चेतावनी
ये है मामला
प्रवीन राठी के परिजनों ने पुलिस पर आरोप लगाया है कि उसे खेत से उठाकर मुठभेड़ में गिरफ्तार दिखाया गया। वहीं पुलिस का कहना है कि मुठभेड़ एकदम असली है और गांव में मकान बिकाऊ के पोस्टर प्रवीण राठी के परिजनों ने दबाव बनाने की नीयत से लगाए हैं।
दोघट थाना क्षेत्र में गांगनौली गांव के जंगल में चार दिन पहले पुलिस ने मुठभेड़ में प्रवीण राठी को गिरफ्तार किया था। गोली लगने से प्रवीण घायल हो गया था। बुधवार को प्रवीण की मां एवं गांगनौली की प्रधान सुभाषना राठी और उनके पति सत्यवीर राठी ने पत्रकारों के सामने कहा कि 30 अगस्त की शाम पांच बजे प्रवीण खेत पर काम करने गया था। पुलिस खेत में पहुंची और प्रवीण को उठाकर ले गई। इसके बाद गांगनौली-टीकरी मार्ग पर ले जाकर फर्जी मुठभेड़ दिखाकर प्रवीण के पैर में गोली मार दी। उनका बेटा चार साल से गांव में रह रहा था। गांव वाले भी बता सकते हैं कि उसने कोई अपराध नहीं किया।
वहीं पुलिस जब खेत में गई थी तो रास्ते में एक मकान में सीसीटीवी कैमरे में आते-जाते पुलिसकर्मी दिख रहे हैं। वह फुटेज उनके पास है। जब पुलिस ग्राम प्रधान के बेटे को उठाकर फर्जी मुठभेड़ दिखा सकती है, तो उनका गांव में रहने का कोई मतलब नहीं है। वे पलायन करने के लिए मजबूर होंगे। गांव में मकान बिकाऊ है के पोस्टर भी चस्पा कर दिए हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से मुठभेड़ की जांच कराने और दोषी पुलिसकर्मियों पर कानूनी कार्रवाई की मांग की।
पोस्टर लगाने की रची साजिश, खोली जाएगी हिस्ट्रीशीट : सीओ
सीओ बड़ौत आलोक कुमार का कहना है कि पोस्टर चस्पा करने की शुरुआती जांच में प्रवीण राठी के परिवार की साजिश सामने आई है। आरोपियों की हिस्ट्रीशीट खोली जा रही है। मुठभेड़ असली थी। प्रवीण राठी, प्रमोद गांगनौली और उनके परिवार के अन्य सदस्यों के खिलाफ कई मुकदमे दर्ज हैं। पुलिस कप्तान ने पूरे परिवार का आपराधिक रिकॉर्ड तलब किया है।