एक महिला के लिए मां बनने से ज्यादा बड़ी खुशी और क्या हो सकती है लेकिन यदि उसकी यह खुशी अगले ही पल गम में बदल जाए तो इससे बड़ा दुख भी उसके लिए कोई और नहीं हो सकता। ऐसी ही एक घटना मेरठ में हुई जहां एक दंपत्ति को शादी के आठ साल बाद माता पिता बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। परिजन घर में किलकारी गूंजने की खुशियां मनाने की तैयारी कर रहे थे कि अगले पल उन्हें ऐसी खबर मिली जिसने उन्हें झकझोर कर रख दिया।
आइए जानते हैं कि आखिर क्या था यह मामला :-
प्रसव के दौरान अस्पताल में हुई बच्ची की मौत
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हंगामा करते तीमारदार
- फोटो : अमर उजाला
किस्मत का फेर कहें या अस्पताल की लापरवाही कि शहर के एक निजी अस्पताल में एक महिला के लिए मां बनने की खुशी अगले ही पल गम में बदल गई। सूरजकुंड में अस्पताल में प्रसव के दौरान एक बच्ची की मौत हो जाने पर शनिवार रात बखेड़ा खड़ा हो गया। परिजनों ने इस संबंध महिला चिकित्सक पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा किया। सूचना मिलने पर पुलिस ने मामला शांत कराया।
आठ साल बाद घर में गूंजी थी किलकारी
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अस्पताल में हंगामा करती महिला
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जानकारी के मुताबिक नौचंदी थाना क्षेत्र के कैलाशपुरी निवासी अर्पणा पत्नी अर्पित को प्रसव पीड़ा के कारण सूरजकुंड स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। आठ साल के बाद अर्पणा ने एक बच्ची को जन्म दिया। लेकिन प्रसव के दौरान बच्ची की मौत हो गई। तीमारदारों ने आरोप लगाया कि महिला डॉक्टर की लापरवाही से बच्ची की मौत हुई है।
डॉक्टरों ने कहा इलाज में नहीं हुई लापरवाही
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बच्ची की मौत पर दुखी परिजन
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वहीं, महिला डॉक्टर का कहना है कि बच्ची ने जन्म लेते ही दम तोड़ दिया था। इलाज में कोई लापरवाही नहीं हुई, जबकि तीमारदारों ने अस्पताल पर आरोप लगाते हुए यह भी कहा कि अस्पताल में बच्ची की मौत से कुछ ही घंटे पहले एक अन्य बच्चे की डॉक्टरों की लापरवाही से मौत हुई थी।
पुलिस ने शांत कराया मामला
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मामले को शांत करती पुलिस
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मामला बढ़ने लगा तो तीमारदारों की अस्पताल में भीड़ लगने लगी। सूचना पर पहुंची पुलिस ने दोनों पक्षों को समझा-बुझाकर शांत कराया। पुलिस ने तीमारदारों को लिखित रूप शिकायत दर्ज कराने और कार्रवाई की बात कही। करीब दो घंटे तक अस्पताल परिसर में गहमागहमी रही। सीओ सिविल लाइन रामअर्ज ने बताया कि देर रात तक अस्पताल के खिलाफ कोई लिखित में तहरीर नहीं आई।