शूटर सौरभ चौधरी का गांव मेरठ जिला मुख्यालय से 27 किलोमीटर दूर है। कभी गांव की पहचान गन्ने के साथ आलू की खेती से होती थी, लेकिन अब दुनिया में यहां का सितारा अर्जुन अवार्डी सौरभ चौधरी चमक रहा है। 10 मीटर एयर पिस्टल की व्यक्तिगत स्पर्धा में शूटर को हार जरूर मिली, लेकिन उम्मीदें बरकरार है। ग्रामीण कहते हैं कि यह हार हमारे खिलाड़ी को हौसला और नई सीख देगी। क्वालिफाई राउंड में सौरभ ने दुनिया को दिखाया कि क्यों लोग उसकी पिस्टल के मुरीद हैं।
इंतजार की घड़ी: अगले राउंड में जरूर जीतेगा म्हारा हीरो, पढ़िए सौरभ चौधरी की हार पर क्या बोले, माता-पिता और भाई
दीपक कहते हैं कि अभी तो खेल बाकी है, पदक जरूर आएगा। सौरभ के पास लंबा कॅरियर है। सबसे बड़ी बात यह है कि वह कड़ी मेहनत करता है। यह कह सकते हैं कि बस शनिवार को फाइनल में उसका दिन नहीं था।
सर्वेश चौधरी कहते हैं कि सौरभ बेहद सकारात्मक है। वह पीछे हटने वाला खिलाड़ी नहीं है। हार भले ही मिली हो, लेकिन वह दुनिया का ध्यान एक बार फिर अपनी ओर खींचने में कामयाब रहा है।
‘पहली बार लगा मुझे सौरभ के साथ होना चाहिए था’
कोच अमित श्योराण कहते हैं कि यह बेहद तकलीफदेह है। पहली बार लगा कि मुझे सौरभ के पीछे खड़ा होना चाहिए था। खिलाड़ियों के साथ उनके निजी कोच जरूर भेजे जाने चाहिए। क्वालिफाई राउंड और फाइनल के बीच करीब 45 मिनट का वह समय था, जब किसी भी खिलाड़ी को कोच की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। सौरभ निश्चित तौर पर वापसी करेगा, अभी उसके पास मौका है। वह कोई कमी बाकी नहीं रखेगा। पदक नहीं जीत पाने का मलाल है, लेकिन सौरभ बड़ा खिलाड़ी है और वह देश की निशानेबाजी का भविष्य है।
ओलंपिक पदक जरूर दिलाएगा सौरभ : नितिन
सौरभ चौधरी को ओलंपिक तक पहुंचाने वाले उसके बड़े भाई नितिन चौधरी कहते हैं कि पदक जरूर आएगा, बस इंतजार बढ़ गया है। सौरभ धुन का पक्का है और लक्ष्य हासिल किए बिना चैन से नहीं बैठता। टोक्यो में अभी भी मौका बरकरार है। अभी सौरभ सिर्फ 19 साल का है, उसके पास अवसरों की कमी नहीं है। वह अपने हर शॉट से सीखकर आगे बढ़ने वाला खिलाड़ी है।
हार के बाद ही बनता है असली खिलाड़ी
सौरभ के दादा सुखपाल सिंह कहते हैं कि हार जीत तो खेल का हिस्सा है। हार के बाद ही खिलाड़ी का हुनर निखरकर सामने आता है। सौरभ तो सबका लाडला और मेहनती बच्चा है, वह फिर सबको अपना दम दिखाएगा।
सौरभ ने ताकत झोंकी, भाग्य साथ नहीं था : जगमोहन
निशानेबाज के पिता जगमोहन कहते हैं कि सौरभ ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी, लेकिन बस भाग्य उसके साथ नहीं था। क्वालिफाई राउंड में सौरभ अपने पूरे रंग में नजर आया, जब फाइनल खेलने उतरा तो भाग्य उसके साथ नहीं था। वह वापसी करेगा। ओलंपिक में पहुंचकर गांव का नाम रोशन किया है। हमारे देश के लिए बहुत बड़ी बात है। वह फिर पदक जीतकर दिखाएगा।