गंगनहर पटरी पर हुए हादसे के बाद बदहवास परिजन अपने बच्चों की सकुशलता की दुआएं करते हुए घटनास्थल पर पहुंचे। यहां दो छात्रों को सकुशल देख उनके परिजनों ने राहत की सांस ली तो वहीं बाकी चारों अपने बच्चों लिए उफनती नहर की तरफ टकटकी लगाए देखते रहे। बेसुध परिजन कड़ाके की ठंड में वहीं डटे रहे।
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- फोटो : अमर उजाला
एक तरफ परिजनों को हादसे ने झकझोर दिया था तो वहीं, दूसरी तरफ छात्र-छात्राओं के बेमेल दोस्ती ने उन्हें उलझन में डाल दिया। सभी के परिजनों को घटनास्थल पर पहुंचने के बाद ही उनकी दोस्ती का पता चला।
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परिजन सभी की दोस्ती से अनजान थे। किस तरह वे सभी दोस्त बने, इसकी किसी को जानकारी नहीं थी। मौत के मुंह से लौटकर आए दोनों छात्र भी पूछताछ में बार-बार अपने बयानों से पलट रहे थे। फिलहाल उनकी दोस्ती पुलिस और परिजनों दोनों के लिए ही पहेली बनी हुई है।
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तो बना रहता रहस्य...
परिजनों के अनुसार घर से निकलते समय किसी ने भी उन्हें सही जानकारी नही दी थी। इसलिए अगर हादसे के बाद अनमोल और हर्षित सकुशल नहर से बाहर नहीं निकलते तो घटना अपने आप में रहस्य बनकर रह जाती।
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18 घंटे से लगातार एनडीआरएफ का ऑपरेशन जारी
गाजियाबाद। मुरादनगर कांवड़ मार्ग पर शनिवार देर रात कार गंगनहर में गिरने के बाद बहे दो छात्राओं समेत चार लोगों की एनडीआरएफ की टीम लगातार 18 घंटे से तलाश कर रही है। टीम ने सूचना मिलते ही अपनी बोट को शनिवार रात 1.50 बजे पानी में तार दिया। एनडीआरएफ की डीप डाइविंग टीम लगातार शिफ्टवार युवाओं की तलाश में जुटी हुई है। खबर लिखे जाने तक टीम को कोई सफलता नहीं मिली है।