जम्मू-कश्मीर में आतंकियों से मुठभेड़ हो या फिर सरहद पर रखवाली का जिम्मा। मेरठ के आरवीसी सेंटर एंड कॉलेज में तैयार किए गए साइलेंट वारियर्स श्वान देश में अहम भूमिका निभा रहे हैं। भारतीय सेना का महत्वपूर्ण अंग बने 1000 से भी ज्यादा इन मूक योद्धाओं का वर्षों से अहम योगदान रहा है। आरवीसी के प्रशिक्षित श्वान ही नहीं बल्कि यहां के अश्वों की भी दुनिया भर में मांग है। यहां के घुड़सवारों ने हाल ही में एशियन खेलों में दो सिल्वर मेडल जीतकर देश में एक और इतिहास रच दिया है।
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डॉग स्क्वॉयड दिल्ली पुलिस
- फोटो : विवेक निगम/अमर उजाला, नई दिल्ली
भारतीय सेना की आन-बान-शान में चार चांद लगाने वाला आरवीसी सेंटर एंड कॉलेज 14 दिसंबर को अपना 240वां कोर डे मनाने जा रहा है। सेना में सिर्फ जवान ही नहीं लड़ते बल्कि यहां पर एक और नाम ऐसा है जो दुश्मनों के दांत खट्टे कर देता है। सेना में इन्हें साइलेंट वारियर्स कहा जाता है। यानी मूक योद्धा।
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हत्या के बाद जांच में डाग स्कवायड।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
जी हां, आर्मी श्वान के बारे में जितनी तारीफ की जाए उतना कम है। एक सैनिक की तरह इन श्वान की भी स्पेशल ट्रेनिंग बेहद सख्त मानी जाती है। मेरठ के आरवीसी ट्रेनिंग स्कूल में प्रशिक्षित किए गए साइलेंट वारियर्स पैंतीस फीट बर्फ में दबे हुए सेना के जवानों को खोजने की क्षमता रखते हैं। जमीन के भीतर कई फीट नीचे बिछे हुए एक्सप्लोसिव डिवाइस को ये चंद सेकेंडों में सूंघ लेते हैं।
देश की सुरक्षा में इनकी इतनी अहम भूमिका हो गई है कि पिछले कई वर्षों में यहां के तैयार किए श्वान ने कितने ही आतंकियों को पकड़ने में अहम भूमिका निभाई है। यहां एक आर्मी श्वान को तैयार करने में वर्षों लग जाते हैं। चीते जैसी फुर्ती रखने वाले इन श्वान की संख्या इस वक्त देश में करीब 1000 से ज्यादा है। इनकी संख्या को बरकरार रखने का जिम्मा आरवीसी सेंटर पर है।
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डॉग स्क्वॉयड दिल्ली पुलिस
- फोटो : विवेक निगम/अमर उजाला, नई दिल्ली
इनके करतब देखकर ही इनकी ताकत और सोचने की शक्ति का अंदाजा लगाया जा सकता है। कई मित्र देशों को भी यहां के प्रशिक्षित श्वान दिए गए हैं। आरवीसी ने सिर्फ सेना को ही नहीं बल्कि पैरामिलिट्री फोर्स और पुलिस को भी उच्च नस्ल के प्रशिक्षित श्वान और अश्व दिए हैं। आजकल सरहद पर इनका इस्तेमाल दिन-रात काउंटर इमरजेंसी और घुसपैठ रोकने के लिए किया जा रहा है।