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अमर उजाला लाइव: कुछ ऐसे हैं दंगा पीड़ितों के हालात, जिक्र आते ही छलक पड़े आंसू, सुनाई दर्द भरी कहानी

Sat, 07 Sep 2019 05:37 PM IST
कपिल kapil गिरिराज सिंह, अमर उजाला, मुजफ्फरनगर
गिरिराज सिंह, अमर उजाला, मुजफ्फरनगर Published by: कपिल kapil Updated Sat, 07 Sep 2019 05:37 PM IST
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Riot 2013: Know how is the present situation in the villages of Muzaffarnagar after the riots
शाहपुर में दंगे के छह साल बीत जाने के बाद भी झोपड़ी में रहते दंगा पीड़ित - फोटो : अमर उजाला

छह साल बीतने के बावजूद दंगे का दर्द दिलों में जिंदा है। यह दंश दोनों पक्षों ने झेला। घरों को छोड़ यहां-वहां बसे सैकड़ों परिवार सामान्य जिंदगी के लिए जद्दोजहद में हैं। अपनों को खो देने वाले परिवारों के जख्म भी ताजा हैं और जिक्र आते ही दर्द छलक उठता है। अगली स्लाइडों में तस्वीरों के साथ जानिए पूरा अपडेट-

Riot 2013: Know how is the present situation in the villages of Muzaffarnagar after the riots
मुजफ्फरनगर दंगे के पीड़ित लोग - फोटो : अमर उजाला

मुजफ्फरनगर में शाहपुर से सटे गांव पलड़ा में कुटबा, कुटबी और दुल्हैरा से विस्थापित हुए करीब 250 परिवार बसे हैं। सपा सरकार ने इन्हें पांच-पांच लाख रुपये का मुआवजा दिया था, जिससे जमीन खरीदकर लोगों ने अपने मकान बना लिए। बस्ती में घुसते ही कय्यूम के मकान में यूनुस और फुरकान बातचीत करते नजर आते हैं। दंगे का जिक्र आते ही कहते हैं कि उन्होंने जो झेला है वह किसी को न झेलना पड़े। मकान तो मिल गए, लेकिन रोजगार के लिए जद्दोजहद करनी पड़ रही है।

Riot 2013: Know how is the present situation in the villages of Muzaffarnagar after the riots
कुटबा में दंगा पीड़ितों के बंद मकान - फोटो : अमर उजाला

वहीं नजदीकी घरों से आए खुर्शीद, इरशाद, शाहरून, असगर आदि कहते हैं कि बस्ती के ज्यादातर लोग मजदूरी करते हैं, लेकिन काम बहुत मंदा है। कय्यूम, कुरबान और अकरम ने कहा कि उनकी न्याय की उम्मीद टूटती जा रही है।

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Riot 2013: Know how is the present situation in the villages of Muzaffarnagar after the riots
दंगे के बाद खंडहर पड़े मकान - फोटो : अमर उजाला

खंडहर हो रहे विस्थापितों के घर
दंगे के दौरान विस्थापित हुए परिवारों के गांवों में स्थित घर खंडहर हो रहे हैं। कुटबा से जाकर पलड़ा एवं शाहपुर में बसे लोगों के घरों पर ताले लटके हैं। यहां स्थित एक मस्जिद पर भी ताला लगा है। पलड़ा में रह रहे परिवारों के सदस्य कहते हैं कि कभी कभार गांव में चले जाते हैं, लेकिन अब वहां रहना नहीं चाहते।

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Riot 2013: Know how is the present situation in the villages of Muzaffarnagar after the riots
मुजफ्फरनगर दंगों के पीड़ितों ने सुनाई आपबीती - फोटो : अमर उजाला

उधर, दुल्हैरा से गए कुछ परिवार गत वर्ष गांव लौट आए थे। गांव निवासी कय्यूम बताते हैं कि गांव से पलायन नहीं हुआ था। वे लोग ही गांव छोड़कर गए थे जिनके बाहर पहले से मकान बने थे। भाजपा नेता विजय चौधरी और राशन डीलर साजिद बताते हैं कि गांव में दंगा नहीं हुआ था।

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