मुजफ्फरनगर में सात सितंबर 2013 का वो मनहूस दिन, जब कवाल कांड के विरोध में महापंचायत बुलाई गई थी और इसमें शामिल होने आ रहे लोगों पर हमले के बाद सांप्रदायिक हिंसा भड़क उठी थी। इस चिंगारी ने पत्रकार राजेश वर्मा समेत तीन लोगों की जान ले ली थी, जिसकी टीस पीड़ित परिजनों को आज तक सालती है।
मुजफ्फरनगर दंगा: छह साल बीत गए, बिन मुखिया सूनी हैं अंखियां, पत्रकार के परिवार की दर्दभरी दास्तां
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वहीं दंगे के बाद सरकार ने पीड़ित परिवारों के जख्मों पर मुआवजे का मरहम तो लगाया, लेकिन हमेशा के लिए बिछड़ चुके अपनों को याद कर आज भी आंसू ही बहते हैं।
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शहर के दाल मंडी निवासी राजेश वर्मा एक चैनल में पत्रकार थे, जिनकी सात सितंबर को हिंसा भड़कने के बाद शहर के फक्करशाह चौक पर दो पक्षों में संघर्ष की कवरेज करते हुए गोली लगने से मौत हो गई थी। उनके परिवार में पत्नी नीरू वर्मा के साथ ही बड़ा बेटा सारांश वर्मा और बेटी शिवानी हैं। एकाएक सिर से परिवार के मुखिया का साया उठने से पूरा परिवार हतप्रभ रह गया।
तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी व राहुल गांधी के साथ ही अखिलेश यादव भी राजेश वर्मा के परिवार को सांत्वना देने पहुंचे। परिवार को आर्थिक सहायता के साथ ही बेटे सारांश को कलक्ट्रेट में सरकारी नौकरी भी दी गई, लेकिन दंगे के छह साल बीतने के बावजूद आज भी परिजनों की सूनी आंखों से सात सितंबर का दिन आते ही आंसू छलकने लगते हैं। मुआवजे व सरकारी नौकरी से परिवार का खर्च जैसे-तैसे चल रहा है, लेकिन पूरे परिवार को मुखिया राजेश वर्मा की कमी शिद्दत से खलती है। इन छह सालों में राजेश वर्मा की पत्नी नीरू वर्मा ने पूरे परिवार की जिम्मेदारी संभालते हुए पहले बिटिया शिवानी की शादी मोरना निवासी अंकित मेहर से कराई, जो आजकल पुणे में रह रही है।
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इसके बाद बेटे सारांश की शादी मोहल्ला प्रेमपुरी निवासी प्रियंका वर्मा से कराई। पुत्रवधू प्रियंका गर्भवती है, जिसके चलते नन्हे मेहमान के आगमन से परिवार प्रफुल्लित तो है, लेकिन राजेश वर्मा की कमी से आहत भी है।