आय से अधिक संपत्ति अर्जित कर निर्माण कराया जाता है तो जेहन में ये सवाल जरूर आता है कि अमुक व्यक्ति कहीं अवैध कार्यों तो लिप्त नहीं है। ऐसे ही एक निर्माण पर अमर उजाला ने जांच पड़ताल की तो खाकी के काले कारनामों की पोल खुलती चली गई।
सीक्रेट फार्म हाउस का खुलासा होते ही थानाध्यक्ष ने नष्ट किए सबूत, इस ओर इशारा कर रही मौके से मिली ये चीजें
थानाध्यक्ष ने जिस तरह से घने जंगलों के बीच माॅडल काॅटेज, स्वीमिंग पूल आदि से लैस एक सीक्रेट फार्महाउस बनाया हुआ था, उससे खाकी पर सवाल उठने लाजिमी हैं।
यही नहीं बताया गया कि इस आलीशन इमारत का खुलासा होते ही थानाध्यक्ष ने सबूत मिटाने की कोशिश भी की है। इससे संभावना जताई जा रही है कि थानाध्यक्ष के इस सीक्रेट बंगले में कहीं अवैध कार्य तो नहीं किए जा रहे थे। आगे पढ़ें पूरी रिपोर्ट :-
ताला बंद करने के बाद कागजात जलाए
मंगलवार को अमर उजाला में धर्मेंद्र के फार्म हाउस का खुलासा होने के बाद वहां तैनात हस्तिनापुर थाने के सिपाही और होमगार्ड को थाने बुला लिया गया था। फार्म हाउस में ताला लगा दिया गया था। बुधवार को फार्म हाउस के बाहर कुछ जले हुए कागज देखे गए। लग रहा है जांच शुरू होने से पहले ही कुछ सबूतों को नष्ट करने का प्रयास किया गया है।
थानाध्यक्ष ने द्रौपदी घाट के नजदीक घने जंगल में खेतों के बीच दो बीघा जमीन पर आलीशान फार्म हाउस बनवाया है। इसकी चौबीसों घंटे रखवाली के लिए थाने के एक सिपाही और एक होमगार्ड को भी तैनात किया गया है।
वहीं चर्चा है कि इस फार्म हाउस में अवैध कार्यों को भी अंजाम दिया जाता था। यहां चुनिंदा लोग पार्टियां करने पहुंचते थे, फार्म हाउस के आसपास पड़ी बिसलेरी आदि की बोतलें इस बात की गवाही दे रहीं थी।
मलाईदार थानों से हटाए तो ड्यूटी ही नहीं की
धर्मेंद्र की ज्यादातर पोस्टिंग मलाईदार थानों में ही रही है। कभी थानाध्यक्ष पद से हटाए गए तो वह थाने में ड्यूटी नहीं करते थे। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, धर्मेंद्र इंस्पेक्टर रैंक वाले थानों लिसाड़ी गेटए सरूरपुर व मवाना में लंबे समय तक तैनात रहे।
मेडिकल, परीक्षितगढ़ और हस्तिनापुर थाने का चार्ज भी उनके पास रहा है। धर्मेंद्र को मेरठ में दो बार थाने के चार्ज से हटाकर पुलिस लाइन भेजा गया। लाइन में जाते ही सत्ताधारी नेता की सिफारिश पर फिर कोई न कोई थाना दे दिया जाता था।