सहारनपुर में जहरीली शराब से तबाह हुए कई परिवारों के लिए जीवन का सफर अब आसान नहीं रहा। कहीं घर बनाने का सपना टूटा तो कहीं बच्चों के भविष्य की चिंता पीड़ित परिवारों को विचलित कर रही है। मासूम बच्चे अभी अपने पिता का इंतजार कर रहे हैं, तो कहीं बूढ़ी आंखें अपने पोतों की मासूम भोली सूरत को देखते ही बरस रहीं हैं। आगे तस्वीरों में देखें आखिर अब इन परिवारों को किस बात की फिक्र सता रही है : -
जहरीली शराब से तबाह हुए परिवारों को अब सता रही इस बात की चिंता, तस्वीरों में झलका दर्द
मौत के जाम ने न सिर्फ पीने वाले को खत्म कर दिया, बल्कि उसके परिवार के हर उस व्यक्ति को जीते जी बेजान कर डाला जो सिर्फ उस पर ही निर्भर था। ग्राम उमाही में तबाह हुए परिवार बेबस होकर सिर्फ आंसू बहाए जा रहे हैं। उमाही के 72 वर्षीय रामशा पर दुखों का ऐसा पहाड़ टूट पड़ा है कि वह बेजान से हो गए हैं। दो साल पहले ही उनके बड़े बेटे की खाना बनाते समय जल जाने से मौत हो गई थी।
उसकी एक विधवा और बच्चों का सहारा बने हुए थे। लेकिन जहरीली शराब ने उनके दोनों बेटों को लील लिया। उनके बेटे राजू एवं राजेश की जहरीली शराब होने से मौत हो गई थी। घर में तीन विधवा पुत्र-वधुएं सात पौत्र एवं चार पौत्रियां रह गए। बच्चे सभी छोटे-छोटे हैं। बूढ़े कंधों पर इनकी जिम्मेदारी आ गई। वह फूट-फूट कर रो पड़े। रामशा अपनी तकदीर को कोसते हुए कहते हैं कि अब तो भगवान भरोसे ही परिवार है।
हादसे का शिकार हुए इसी गांव के मृतक अरविंद की पत्नी पिंकी की अभी तक सिसकियां नहीं रुकी हैं। चार साल पहले ही उसकी शादी हुई थी, बेटा राज करीब दो वर्ष का है बेटी मात्र 45 दिन की है। बिलखती हुई पिंकी कहती है कि उसके पास तो कुछ भी नहीं बचा, सब कुछ अंधेरा ही नजर आ रहा है जिंदगी में। बच्चों को कहां ले जाएं, न जमीन और न की कोई रोजगार है। कहां से बच्चों का पेट भरेगी। अभी तो बच्चे इतने मासूम हैं कि उन्हें बड़े होने तक अपने पिता की सूरत भी याद नहीं रहेगी। बच्चे बड़े होकर अपने पिता के बारे में पूछेंगे तो क्या कहेगी।
मृतक राजू की पत्नी बबली तो अभी तक सदमे से बाहर नहीं आ पाई है। वह कहती है कि दर-दर भटक रहे थे, उनका अरमान था कि सिर छुपाने के लिए एक छत मिल जाए, वह इसके प्रयास भी कर रहे थे, लेकिन सब कुछ बर्बाद हो गया, जिंदगी की आस ही खत्म हो गई, उनके पास तो सिर छुपाने के लिए जगह भी नहीं है। कहां लेकर जाएं अपने बच्चों को। बड़े बेटे राजा की उम्र 15 साल हो चुकी है, इस छोटी सी उम्र में सारे घर की जिम्मेदारी अब उसी के ऊपर है।
मृतक राजेश के परिवार पर कुदरत की ऐसी मार पड़ी है कि परिवार बिखर गया है। घर में तीन दिन से मातम के अलावा कुछ नहीं है। राजेश की पत्नी मंजू कहती है कि इस जानलेवा शराब ने उसकी दुनिया ही उजाड़ दी चार बच्चों में दो बेटे हैं जो मूक बधिर हैं। न सुन सकते हैं और न बोल सकते हैं। बड़ी बेटी नेहा 14 वर्ष की हो चुकी है कमाने का कोई साधन नहीं है। न जाने जीवन की गाड़ी कैसे चलेगी ?