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मुजफ्फरनगर: जरा से बवाल पर सुलग उठा था पूरा कवाल, जानें क्या थी इस कांड की असली वजह

Thu, 07 Feb 2019 04:58 PM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरनगर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरनगर Published by: कपिल kapil Updated Thu, 07 Feb 2019 04:58 PM IST
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Muzaffarnagar: story of kaval village, it was the main reason of kawal massacre
kawal case

मुजफ्फरनगर में कवाल दंगे के दौरान मारे गए लोगों के परिजन उस घटना को याद कर आज भी सिहर उठते हैं। दंगे के आरोपियों को दोषी करार दिए जाने के बाद मलिकपुरा के मृतक सचिन की पत्नी स्वाति बोली कि वह साढे़ पांच साल से न्याय का इंतजार कर रही थी। उन्हें पूरा भरोसा था कि अदालत से हत्यारों को कड़ी सजा मिलेगी। कलक्ट्रेट में कार्यरत मृत सचिन की पत्नी स्वाति कहती हैं कि न्याय के इंतजार में उनकी आंखें थक गई हैं। साढे़ पांच साल अदालत का फैसला आया। उसने कहा कि जिस तरह उसके पति सचिन और गौरव को घेरकर हत्या की गई थी, इस तरह की हिम्मत दोबारा कोई नहीं करेगा। हमें कानून पर पूरा यकीन है। आगे स्लाइड्स में जानें आखिर क्यों जरा सी बात पर उठी थी दंगे की लपटें: -

Muzaffarnagar: story of kaval village, it was the main reason of kawal massacre
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स्वाति कहती हैं कि कानून से ही पूरा परिवार आस लगाए हुए था। आरोपियों को दोष सिद्ध होने की खबर सुनने के बाद भावुक हुई स्वाति ने कहा कि हमें कानून और भगवान दोनों पर भरोसा था। न्याय तेजी के साथ कम समय में मिले तो अपराधियों के अंदर खौफ होगा और अपराध कम होंगे।  उधर, मृतक गौरव के पिता रविंद्र सिंह ने कहा कि उन्हें न्यायालय पर पूरा भरोसा है। अदालत हमें उचित न्याय दिलाएंगी।

 
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दंगों में मरने वाले परिवार के जख्म आज भी ताजे
मोरना (संजय राठी)। दंगों के दौरान मारे गए लोगों के परिजन उस घटना को याद कर आज भी सिहर उठते हैं। अपनों को खोने का गम उनके चेहरों पर साफ झलकता है। सात सितंबर 2013 को भड़के दंगे में मोरना क्षेत्र के छह लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी, जिसको जहां आसरा मिला वहीं छिप गया। गांव किशनपुर का निसार अभी तक लापता है. जिसको परिजनों ने काफी  तलाश किया, लेकिन उसका पता नहीं चल सका। दंगों में जला दिए गए 16 ट्रैक्टरों का मुआवजा तो सरकार ने दे दिया था, लेकिन मृतक के परिजनों की आंखों में अपनों के खोने के जख्म को नहीं भर सकी।

 
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ऐसे भड़की थी कवाल में दंगे की चिंगारी 
27 अगस्त 2013 को जानसठ कोतवाली के गांव कवाल में साइकिल और बाइक टकराने को लेकर झगड़ा हुआ था। शाहनवाज की मौत के बाद ममेरे भाइयों सचिन और गौरव की हत्या कर दी गई थी। इस हत्याकांड को सांप्रदायिक रूप दिया गया और पंचायतों का दौर शुरू हो गया। गौरव के पिता रविंद्र सिंह ने 27 अगस्त, 2013 को दोपहर 2.45 पर जानसठ कोतवाली में इस दोहरे हत्याकांड की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। कई दिनों तक ज्ञापन और पंचायतों के बाद सात सितंबर को नंगला मंदौड़ की महापंचायत के बाद जिले में दंगा भड़क उठा था।
 
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महापंचायत से लौटते वक्त हुए हमले
नंगला मंदौड़ के इंटर कालेज के मैदान में हुई पंचायत से ट्रैक्टर ट्रॉलियों और अन्य वाहनों से लौटते समय लोगों पर जौली गंगनहर पर हमले कर दिए गए थे।
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