कुछ ही देर में सारे अरमान जल कर आंखों के सामने खाक हो गए। लोग चीखते रहे, रुदन करते रहे और आग तांडव मचाती रही। जैसे-तैसे बनाए गए छप्पर के आशियाने जलकर जमींदोज हो गए। मवेशी और पूंजी बचाने की जद्दोजहद होने लगी, पर जान पर बन आई तो लोग भागने लगे। लोगों ने कहा कि अगर फायर ब्रिगेड समय पर आती तो इतना नुकसान न होता। आगे देखिए तस्वीरें-
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गांव में लगी भीषण आद
- फोटो : अमर उजाला
सहारनपुर में शिवालिक जंगल से सटे गांव खुवाशपुर के लोगों को अंदाजा भी नहीं था कि कुछ ही देर में उनके आशियाने उजड़ जाएंगे। कहीं से चिंगारी आई और सबकुछ जलाकर राख कर दिया। 600 परिवार बच्चों को लेकर बचने के लिए इधर-उधर भागते रहे। छप्पर की बल्लियों पर सांप की तरह लिपटी लपटें तबाही का मंजर दिखा रही थीं। आस थी कि फायर ब्रिगेड कुछ बचा लेगी, लेकिन वह करीब ढाई घंटे देरी से पहुंची।
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आग बुझाते ग्रामीण
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ग्राम प्रधान रियाजुल चौधरी ने बताया कि उन्होंने आज तक ऐसा मंजर नहीं देखा। बच्चे, बूढ़े, जवाब सब चीखते-चिल्लाते बस दौड़ रहे थे। कुछ लोग अपने परिजनों को तलाश करते हुए भाग रहे थे।
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गांव में 100 से ज्यादा घर जलकर राख हुए
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पता चला है कि शिवालिक की पहाड़ियों में जंगल में आग लगी हुई है। जंगल से ही चिंगारी उनके गांव तक पहुंची। कितने मवेशी मरे, कितने का नुकसान हुआ, ये आकलन सुबह तक हो पाएगा। कइयों की तो जमा पूंजी ही जल गई।
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आग की सूचना पर पहुंची पुलिस
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साहब पीने के पानी के लाले हैं, आग कहां से बुझाएं
जिस गांव में पीने के पानी तक के लाले हैं, जरा सोचिए आग बुझाने के लिए वहां के लोग कहां से पानी लेकर आएंगे। जल संकट और ढाई घंटे देरी से पहुंची फायर ब्रिगेड खुवाशपुर के लोगों के लिए अभिशाप साबित हुई। ग्रामीणों ने पानी के टैंकर बुलाकर आग पर काबू पाने का प्रयास किया, लेकिन उनमें पानी भरने के लिए भी गांव से दो किमी दूर रजबहे पर जाना पड़ रहा था। ऐसे में इतनी भयंकर आग पर काबू पाने की कल्पना भी नहीं की जा सकती।