मेरठ जनपद के हस्तिनापुर में प्राचीन पांडव टीला पर पुरातत्व विभाग की ओर से चल रहे उत्खनन में मिट्टी की सुराही मिली है। इसके साथ ही टेराकोटा के बर्तन, हांडी, प्राचीन पत्थर, पकी ईंट और प्राचीन मकानों की दीवारों के अवशेष प्राप्त हुए हैं। इन्हें पुरातत्व विभाग के अधिकारियों ने जांच के लिए सुरक्षित कराया है।
प्राचीन पांडव टीले पर उत्खनन जारी: अब खुदाई में निकली सुराही, हांडी और टेराकोटा के बर्तन, देखें तस्वीरें
सफर में होता था सुराही का प्रयोग
नेचुरल साइंसेज ट्रस्ट के अध्यक्ष प्रियंक भारती ने बताया कि इस प्रकार की छोटी सुराही का प्रयोग ऐतिहासिक काल के लोग सफर में करते थे। इसे रस्सी में बांधकर गले में टांगकर रखा जाता था। जैसे-जैसे खुदाई नीचे की ओर जाएगी कई ऐतिहासिक अवशेष पुरातत्व विभाग को प्राप्त होंगे।
खुदाई कार्य देखने पहुंच रहे पर्यटक
हस्तिनापुर में रोज सैकड़ों पर्यटक पहुंचते हैं। सोमवार को पहुंचे कई पर्यटक पांडव टीले पर उत्खनन की सूचना मिलने पर खुदाई कार्य देखने पहुंच गए।
बाढ़ ने उजाड़ा था प्राचीन हस्तिनापुर
प्राचीनकाल में हस्तिनापुर पर प्रलयकारी बाढ़ ने कई बार कहर बरपाया। इस बात के साक्ष्य पांडव टीले के उत्खनन में सामने आ रहे हैं। खुदाई में निकल रही मिट्टी बाढ़ और आग लगने की कहानी बयां कर रही है। इन रहस्य से पर्दा उठाने के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की टीम लगी है।
खुदाई के दौरान हस्तिनापुर के कई बार उजड़ने व बसने के प्रमाण मिले हैं। अमृत कूप के पास खुदाई में मिट्टी देखकर आशंका जताई जा रही है कि गंगा लंबे समय तक यहां से होकर बही। कछुआ और मछली के अवशेष भी इस ओर इशारा कर रहे हैं। वर्तमान में गंगा नदी प्राचीन हस्तिनापुर से करीब पांच किलोमीटर दूर उत्तर दिशा में बह रही है। अभी तक मिले अवशेष इशारा कर रहे हैं कि हस्तिनापुर कई बार नष्ट हुआ और कई बार बसाया गया। उत्खनन में आग में जली हुई कुछ हड्डियों के अवशेष भी मिले हैं।
पुराणों में भी जिक्र
पुराणों में भी कहा गया है कि गंगा की बाढ़ के कारण पांडवों की राजधानी हस्तिनापुर बार-बार नष्ट हुई। इसके बाद पांडव हस्तिनापुर छोड़कर कौशाम्बी चले गए थे।