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कराहतीं जिंदगियां: कभी भूल नहीं पाएंगे अपनों का दर्द, खौफनाक था वो मंजर, जिंदा जल गए थे 65 लोग

Wed, 13 Apr 2022 05:42 PM IST
कपिल kapil अमर उजाला ब्यूरो, मेरठ
अमर उजाला ब्यूरो, मेरठ Published by: कपिल kapil Updated Wed, 13 Apr 2022 05:42 PM IST
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Meerut News: Read full panic story of Victoria Park Kand and 65 people was died in incident
फराह जाफरी - फोटो : amar ujala

मेरठ में विक्टोरिया पार्क में 10 अप्रैल 2006 को कंज्यूमर मेला गुलजार था। दिन ढलने लगा था। लोग घरों की तरफ निकलने वाले थे, तभी शाम 5:40 बजे अचानक पंडाल में भीषण आग लग गई। बदहवास लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर दौड़ने लगे। देखते ही देखते करीब 1500 वर्ग मीटर में लगा पंडाल आग के शोलों में बदल गया। लोहे के मजबूत फ्रेम मोम की तरह पिघलकर गिरने लगे। इस भीषण अग्निकांड में 65 जिंदगियां चलीं गईं और 161 लोग गंभीर रूप से झुलस गए।  



चार दिन तक मौत से लड़ते रहे मेरे शौहर, मगर हार गए : फरार जाफरी
मेरठ में वैली बाजार में रहने वालीं फराह जाफरी इन दिनों ऋषभ एकेडमी में पढ़ाती हैं। उनकी दो बच्चियां हैं, बड़ी बेटी जहरा इंजीनियरिंग कर रही है और छोटी अलीना दसवीं में है। फराह ने विक्टोरिया पार्क अग्निकांड में अपने पति अतहर जाफरी (40) को खोया था।

Meerut News: Read full panic story of Victoria Park Kand and 65 people was died in incident
जया तायल। - फोटो : amar ujala

वह बताती हैं कि अतहर एक निजी शिक्षण संस्थान चलाते थे, वह अपने दोस्त के साथ विक्टोरिया पार्क मेले में गए थे। शाम को पता चला कि उनका एक्सीडेंट हो गया है और वह लोकप्रिय अस्पताल में भर्ती हैं। उन्हें यह नहीं बताया गया था कि वह इस हादसे का शिकार हो गए हैं। अस्पताल पहुंची तो देखा बुरी तरह से जले हुए थे। तीन दिन तक वह यहां भर्ती रहे, इसके बाद उन्हें दिल्ली के अस्पताल में शिफ्ट किया गया, लेकिन 14 अप्रैल 2006 को उन्होंने दम तोड़ दिया। तब दोनों बच्चियां मासूम थीं। छोटी बेटी को कुछ याद नहीं, बड़ी बेटी को थोड़ा याद है। मेरे और परिवार के लिए बहुत बड़ा गम है, जिसे अल्फाजों में बयां नहीं किया जा सकता।

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विक्टोरिया पार्क अग्निकांड का फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला

फराह कहती हैं कि विक्टोरिया पार्क अग्निकांड की लड़ाई लड़ रहे लंदन स्पोर्ट्स वाले संजय गुप्ता ने सगे भाई से ज्यादा उनकी मदद की है। अपनी बहन की तरह उनका और उनके परिवार ख्याल रखा है। वह और उनका परिवार संजय गुप्ता का शुक्रगुजार है।

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विक्टोरिया पार्क में बना स्तंभ - फोटो : amar ujala

प्रशासन ने नहीं माना, विक्टोरिया पार्क में हुई मालती तायल की मौत
मेरी मां मालती तायल (70) और पिता रमेश चंद्र तायल (75) की जान भी 10 अप्रैल 2006 को विक्टोरिया पार्क अग्निकांड में चली गई थी। पिता की मौत को तो माना, मगर अब तक प्रशासन ने नहीं माना कि माता की मौत भी वहीं हुई थी। यह कहते हुए मनोरंजन पार्क निवासी नरेश तायल की आंखें नम हो जाती हैं। कहते हैं, मां का शव नहीं मिला, शव इस कदर जले हुए थे कि हम मां का शव पहचान नहीं पाए। एक महिला का शव अज्ञात में बचा था, नौ माह तक उसकी पहचान नहीं हुई। मेडिकल जांच में पता चला उसके दांत असली थे, जबकि हमारी माता के दांत नकली थे, इसलिए उस शव को नहीं अपनाया। हालांकि बाद में हमारी संस्था ने ही उस महिला के शव का अंतिम संस्कार किया। शव बदलने के कारण कोई और परिवार माता का शव ले गया था।

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मेरठ विक्टोरिया पार्क अग्निकांड। - फोटो : amar ujala

पूरा तायल परिवार था पंडाल में
नरेश की पत्नी जया तायल बताती हैं कि वह, पति नरेश, सास मालती, ससुर रमेश चंद्र, दो बेटे अभिषेक और अवनीश छूट पर बेचे जा रहे इलेक्ट्रॉनिक सामान खरीदने मेले में गए थे। हम तंबू से बाहर आ गए थे, सास ससुर अभी अंदर थे। हमारी आंखों के सामने, तंबू आग की लपटों में घिर गए।

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