यूपी के मेरठ में पुलिस और प्रशासन के तमाम दावों के बाद भी सड़क हादसों में कमी नहीं आ रही है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, इस साल मात्र आठ माह में जिले में 678 सड़क हादसे में 303 लोगों की जान जा चुकी है। वहीं पुलिस का कहना है कि लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं। बीते आठ माह में हेलमेट न लगाने पर 25 हजार चालन काटे गए हैं।
जिंदगी छीन रही रफ्तार: तमाम दावों के बाद भी नहीं थम रहे सड़क हादसे, आठ माह में 300 से ज्यादा मौतें
आमतौर पर सड़क हादसों का सबसे बड़ा कारण ओवर स्पीड है। पुलिस इस ओर ध्यान देने की जगह ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों से जुर्माना वसूली में लगी है। ओवर स्पीड वाहनों पर कार्रवाई करने के लिए पुलिस के पास इंटरसेप्टर वाहन भी है, लेकिन पुलिस उसका पूरी तरह उपयोग नहीं कर रही है। देखें आखिर क्या कहती है ट्रैफिक पुलिस की रिपोर्ट: -
ओवर स्पीड वाहनों को लेकर पुलिस ने कभी अभियान नहीं चलाया। हालांकि जिले में ट्रैफिक पुलिस रोज 300 से 400 चालान काटती है, लेकिन इसमें अधिकतर हेलमेट न लगाने वाले ही होते हैं।
ट्रैफिक पुलिस ने साल 2017 में करीब 56 हजार दुपहिया वाहनों की चेकिंग की। इनमें 23,207 दुपहिया वाहन चालकों के चालान हेलमेट न पहनने के कारण काटे। 2018 में भी 36 हजार चालान और इस साल 31 अगस्त तक यह आंकड़ा 25 हजार के पार पहुंच चुका है।
ब्लैक स्पॉट पर नहीं हुआ काम
ट्रैफिक पुलिस के रिकार्ड में एनएच- 58, दिल्ली-मेरठ हाईवे, मेरठ-पौड़ी मार्ग, मेरठ-हापुड़ मार्ग, गढ़ रोड पर 25 ब्लैक स्पॉट चिन्हित हैं। नगर निगम, विकास प्राधिकरण, एनएचएआई, पीडब्ल्यूडी, आरटीओ के साथ मिलकर इन ब्लैक स्पॉट के दुर्घटना कारणों को कम करने को लेकर प्रत्येक तीन माह में सड़क सुरक्षा समिति की बैठक भी होती है। आदेश निर्देश भी जारी होते हैं। लेकिन इन पर कभी काम नहीं होता है।