जीवित रहते हुए हरिओम आनंद के बयान पुलिस को क्यों नहीं कराए? इस पर बेटी मानसी का कहना है कि उनको पूरी उम्मीद थी कि पापा बच जाएंगे। दो दिन पहले अस्पताल में सल्फास खाने का एक ऐसा ही केस आया था, जिसमें डॉक्टरों के प्रयास से मरीज की जान बच गई थी। आगे जानिए पूरा अपडेट-
आनंद आत्महत्या केस: पुलिस को क्यों नहीं कराए पिता के बयान? बेटी मानसी बोली- मुझे उम्मीद थी बच जाएंगे पापा
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मीटिंग में थी तभी फोन आया
मानसी ने बताया कि मार्च के बाद अस्पताल में काम बहुत कम हो गया था। लगातार अस्पताल में मरीजों की संख्या कम होती जा रही थी। कोविड-19 का वार्ड बनाने की परमिशन के लिए वह जिला प्रशासन से मांग कर रहे थे। अस्पताल में पूरी तैयारी हो चुकी थी, इस संबंध में शनिवार को वह सीएमओ के साथ उनके कार्यालय में मीटिंग में थी।
इसी दौरान ही अस्पताल से फोन पहुंचा की पापा ने सल्फास खा लिया है। वह तुरंत अस्पताल पहुंची। पापा ठीक से बात कर रहे थे। उन्होंने कहा कि अब सब ठीक हो जाएगा। पहले वह अपने ऑफिस में बैठे। डॉक्टरों ने तुरंत उनको इमरजेंसी वार्ड में भर्ती किया।
लॉकडाउन खुलते ही देनदारी का बोझ
हरिओम आनंद की बेटी मानसी का कहना है कि लॉकडाउन में देनदारी का तगादा नहीं आया। जैसे ही लॉकडाउन खुला, तगादा करने लोग घर पर आने लगे थे।
सल्फास खाने के बाद ज्यादा पानी पी लिया
डॉक्टरों का कहना कि सल्फास खाने के बाद हरिओम लगातार पानी पी रहे थे। ड्राइवर ने भी रास्ते में तीन बार पानी पिलाया था। बार-बार पानी पीने से सल्फास शरीर में पूरी तरह से घुल गया था।
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