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मेरठ अग्निकांड: कांता ने बचाई 10 लोगों की जान, बेटे और पोती को नहीं बचा सकी; ज्योति को नहीं पता उजड़ गया सुहाग

Mon, 04 May 2026 10:13 PM IST
Mohd Mustakim अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ
अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ Published by: Mohd Mustakim Updated Mon, 04 May 2026 10:13 PM IST
सार

Meerut News: कृष्णा नगर डौरली में आग लगने से सागर और उनकी बेटी शिवानी की मौत हो गई, जबकि 10 लोग घायल हो गए। अस्पताल में भर्ती ज्योति पूरी घटना के बारे में आराम से बात कर रही है, जबकि उसे नहीं पता कि पति व बेटी अब इस दुनिया में नहीं हैं। 

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Meerut fire incident: Kanta saved the lives of 10 people, could not save the son and granddaughter
अस्पताल में भर्ती कांता और ज्योति। - फोटो : अमर उजाला
कृष्णा नगर में मकानों और दुकानों में आग लगने के बाद सबसे पहले अंदर सो रहीं कांता की नींद खुली और उन्होंने शोर मचा दिया। उनके इस प्रयास से मकान में रह रहे दो परिवारों के दस लोग तो बच गए, लेकिन उनके अपने बेटा सागर और पोती शिवानी उर्फ लाली की जान नहीं बच पाई। सागर अंतिम सांस तक बच्चों और परिवार की जान बचाने के लिए आग और धुएं से जूझते रहे।
Meerut fire incident: Kanta saved the lives of 10 people, could not save the son and granddaughter
अस्पताल में भर्ती। - फोटो : अमर उजाला
नींद से जागने के बाद कांता, सागर और उनकी पत्नी ज्योति अपने दोनों बेटों कान्हा व शिवा (10) और बेटी शिवानी की जान बचाने के लिए जूझते रहे। वह बेहोश होने से पहले कभी उन्हें गोद में लेते तो कभी उन्हें आगोश में लेकर छुपाने का प्रयास करते रहे। ज्योति आईसीयू में भर्ती हैं और उन्हें अभी तक पति और बेटी की मौत की जानकारी नहीं दी गई है। पति और बेटी की मौत से अनजान ज्योति ने अपनी आपबीती सुनाई।
Meerut fire incident: Kanta saved the lives of 10 people, could not save the son and granddaughter
डौरली में लगी आग। - फोटो : अमर उजाला
ज्योति ने बताया कि सागर हर रोज लगभग 11 बजे दुकान से घर लौटते थे। खाना खाने के बाद वह, पति सागर और बेटी शिवानी एक कमरे में सो रहे थे। जबकि उनकी सास कांता बराबर के कमरे में दो बेटों कान्हा और शिवा के साथ सो रहीं थीं।
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Meerut fire incident: Kanta saved the lives of 10 people, could not save the son and granddaughter
आग लगी। - फोटो : अमर उजाला
सास कांता ने जब आग लगने का शोर मचाया तो सभी जाग गए। एक बेटे को सागर और दूसरे बेटे को उनकी मां कांता गोद में लेकर उनके कमरे में आ गईं। जान बचाने के लिए संजय का परिवार भी उनके कमरे में आ गया।
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जली बाइक। - फोटो : अमर उजाला
ज्योति ने बताया कि कमरे में आने से पहले दोनों परिवारों ने बाहर निकलने और जीने की ओर जाने का प्रयास किया लेकिन हवा तेज थी और हवा का रुख उनके कमरे की ओर था। इसके चलते आग की लपटें लगभग सभी पांचों कमरों तक पहुंचने लगीं। वह सबसे कोने वाले कमरे में थीं और लपटें यहां कम पहुंच रहीं थीं। इसके चलते सभी लोग इस कमरे में आ गए थे।
 
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