मेरठ में नकली पेट्रोल डीजल का भड़ाफोड़ होने के बाद शहर के कई पेट्रोल पंप पुलिस के निशाने पर हैं। वहीं इस अवैध कारोबार की मार सीधे जनता पर पड़ रही है। दूसरी ओर पेट्रोल और डीजल में थिनर, सॉलवेंट और रंग की मिलावट से वाहनों के इंजन सीज हो रहे हैं। वाहन बनाने वाली कंपनियों के पास भी इसकी शिकायतें पहुंची हैं। पुलिस की सांठगांठ से आखिर कैसे तेल माफिया करते हैं ये खेल आगे पढ़ें:-
नकली पेट्रोल-डीजल वाहनों के इंजन कर रहे बेकार, ऐसे करते हैं खेल, अवैध कारोबार की सीधे जनता पर मार
मेरठ के परतापुर और टीपीनगर में नकली पेट्रोल-डीजल के अवैध धंधे का भंडाफोड़ होने के बाद कई पेट्रोल पंपों की शिकायत सामने आई हैं। पेट्रोल पंपों पर भी बड़ी कार्रवाई हो सकती है। इसको लेकर कई पेट्रोल पंपों के मालिकों में खलबली मची है। टीपी नगर थानाक्षेत्र के पूठा गांव में नकली पेट्रोल-डीजल बनता है, इसको लेकर पुलिस कई बार छापेमारी भी कर चुकी है। यहां से टैंकरों से तेल चोरी की खबर भी आती रहती हैं। मंगलवार को पुलिस ने नकली पेट्रोल-डीजल का भंडाफोड़ कर कई विभागों की पोल खोली है।
पेट्रोल पंप पर खपाया जाता है नकली पेट्रोल-डीजल
पुलिस के मुताबिक आरोपी राजीव जैन के शहर में तीन पेट्रोल पंप हैं। बताया गया कि इन पेट्रोल पंपों पर लंबे समय से नकली पेट्रोल-डीजल को खपाया जा रहा था। ये अवैध कारोबार साठगांठ से चल रहा था। अब इसकी भी जांच कराई जा रही है।
ऐसे करते हैं खेल
पुलिस के मुताबिक आरोपियों ने बताया कि 38 रुपये में एक लीटर पेट्रोल तैयार होता है। तेल माफियाओं की सेटिंग तेल कंपनियों से आने वाले टैंकर चालकों से होती है। वह सीधे टैंकर को उनकी फर्म पर लेकर जाते है। जहां टैंकर से 20-30 प्रतिशत पेट्रोल निकालकर नकली पेट्रोल टैंकर में भर देते है। उसके बाद टैंकर पेट्रोल पंप पर पहुंचता है।
सुबह से गोपनीय टास्क, रात में खुलासा
इस बार पुलिस और क्राइम ब्रांच ने पूठा के बजाय डुंगरावली और वेदव्यासपुरी में कार्रवाई कर तेल माफिया राजीव जैन व फैक्टरी मालिक प्रदीप गुप्ता के अवैध कारोबार का खुलासा किया। देर रात दोेनों तेल माफिया पुलिस के हत्थे चढ़ गए। वहीं, यह मामला लखनऊ तक गूंजा।
शहर के कई बड़े कारोबारी नकली पेट्रोल और डीजल बनाने में शामिल है। पुलिस का दावा है कि जांच सही तरीके से हुई तो शहर के कई पेट्रोल पंपों पर ताले लग जाएंगे। पुलिस द्वारा लिखापढ़ी में पेट्रोल पंपों के नाम खोले जाएंगे। सरकारी तेल कंपनियों की टीम बुधवार को इसकी जांच कर रिपोर्ट पेट्रोलियम मंत्रालय को सौंप सकती है।