मेरठ के मछेरान और भूसामंडी में हुए बवाल ने यहां रहने वाले लोगों को जिंदगी भर का दर्द दिया है। करीब 200 झुग्गी झोपड़ियों में लगी भीषण आग में घर के साथ सपने भी उजड़ गए। हर आंख उस मास्टरमाइंड को तलाश कर रही है, जिसने यह जख्म उन्हें दिया।
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मेरठ बवाल
- फोटो : अमर उजाला
मछेरान में रह रहे लोगों ने कभी नहीं सोचा था कि उन्हें यह दिन भी देखना पड़ेगा। रोज के कमाने खाने वाले और जद्दोजहद भरी जिंदगी जीने वाले इन लोगों के सामने इस घटना के बाद नए सिरे से जिंदगी शुरू करने की चुनौती आकर खड़ी हो गई है।
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वहीं पति की मौत के बाद परिवार को पाल रही वकीला पर मानों मुसीबत का पहाड़ टूट गया हो। वकीला के दो बेटी और एक बेटा है। एक बेटी की शादी वह कर चुकी है। अब एक बेटी और एक बेटा शादी के लिए बचे हैं। वह घर-घर काम कर बेटी के लिए दहेज जुटा रही थी। एक-एक सामान वह जुटाकर बक्से में रख देती।
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बुधवार को लगी आग ने उसकी भी झुग्गी को तबाह कर दिया। दहेज के लिए जुटाया सामान भी आग की भेंट चढ़ गया। अनस का घर उसकी कमाई से चल रहा था। बड़ी मेहनत कर उसने घर में नेट मशीन लगाईं। एक लाख रुपये कीमत की यह मशीन थी जो आग की भेंट चढ़ गई। पूरा परिवार सदमे में है।
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परिवार यह भी नहीं सोच पा रहा कि जिंदगी शुरू करें तो कहां से? आग ने तीन लाख कीमत का तैयार माल भी खाक कर दिया जो असम भेजा जाना था। यही नहीं घर के बाहर खड़ी नई स्कूटी भी आग में जल गई।