यूपी के मेरठ में मणप्पुरम कंपनी में हुई पंद्रह किलों सोने की लूट से पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया। दरअसल इस महालूट की योजना तिहाड़ जेल की सलाखों के पीछे तैयार की गई थी। दिल्ली के डॉ. श्रीकांत का अपहरणकर्ता सुशील दादरी साल 2018 में दिल्ली की तिहाड़ जेल में था, जहां उसकी मुलाकात विपुल निवासी वैष्णो धाम कॉलोनो, कंकरखेड़ा से हुई। बस यहीं से लूट की पटकथा लिखनी शुरू हुई: -
दोनों ने जेल से छूटकर मेरठ शहर में बड़ी लूट करने की योजना बनाई। विपुल ने सुशील को बताया कि कंकरखेड़ा की वंडर सिटी कॉलोनी में उसका दोस्त भगत सिंह तालियान है, जोकि अपने साथियों के साथ मिलकर कंकरखेड़ा, दौराला व पल्लवपुरम क्षेत्र में लूटपाट करता है। विपुल जेल से बाहर आया। उसने भगत से बड़ी लूट करने की बात कही।
दोनों ने सुशील का जेल से छूटने का इंतजार किया। जेल से छूटते ही सुशील को विपुल ने भगत से उसके घर वंडर सिटी में मिलवाया। सवाल उनके सामने था कि आखिर मोटा पैसा कहां मिलेगा, जहां आसानी से लूट हो सकती हो। इसका पता लगाने के लिए तीनों बदमाश अपने-अपने साथियों के साथ लग गए। उनका गिरोह तैयार था, जिसका सरगना सुशील था। कंकरखेड़ा, पल्लवपुरम, दौराला व शास्त्रीनगर में कई बड़े घरों में लूट करने का प्लान बना लिया। लेकिन उन्हें खतरा था कि पोल खुल गई तो पुलिस एनकाउंटर कर देगी।
सुशील और वरुण कैमरे में हुए कैद
कंपनी में अंदर सुशील के साथ वारदात करने कौन जाएगा, इसको लेकर बदमाशों में बहस भी हुई। सुशील ने विपुल को साथ चलने की बात कही। विपुल बोला कि मेरी लंबाई ज्यादा है, आसानी से पुलिस उसको पहचान लेगी। विपुल ने मोदीनगर के युवक वरुण को बुलाया। भगत के घर पर बैठकर प्लानिंग बनाई। वरुण आया औैर उसको सुशील के साथ जाने को तैयार किया गया।
मुथूट कंपनी के बाद मणप्पुरम कंपनी में गया सुशील
बदमाशों ने बेगमपुल स्थित मुथूट गोल्ड लोन की भी रेकी की। उनके ऑफिस में सुशील गया, जहां पर ज्यादा कर्मचारी देखकर वह डर गया। तभी उसकी नजर मणप्पुरम गोल्ड लोन कंपनी पर पड़ी। सुशील वहां गया और लोन लेने की बात करके लौट गया। मणप्पुरम में दो महिला कर्मचारी और एक मैनेजर ऑफिस में रहते हैं। वहां सुरक्षाकर्मी भी नहीं था।