फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

कवाल कांड: जब मुजफ्फरनगर पर टिकी थी पूरे देश की नजरें, नफरत को भूलकर आगे बढ़ने की कोशिश में पीड़ित

Tue, 27 Aug 2019 12:49 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरनगर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरनगर Published by: Dimple Sirohi Updated Tue, 27 Aug 2019 12:49 PM IST
विज्ञापन
kawal case Muzaffarnagar: on this  day before seven years district was burnt in fire of riots
कवाल चौक - फोटो : अमर उजाला
छह साल पहले 27 अगस्त को दोहरे हत्याकांड ने सबको झकझोर कर रख दिया था। इस दोहरे हत्याकांड के बाद पूरा जिला दंगों की आग में झुलस गया था। छह साल बीत जाने के बाद भी जख्म हरे हैं और दोनों तरफ अपनों को गवां देने की पीड़ा का पहाड़ खड़ा हुआ है।


कवाल कांड का जरा सा जिक्र छेड़ते ही लोगों की आंखें उस दिन को याद कर नम हो जाती हैं। लाख कोशिशों के बावजूद अभी तक दोनों वर्गों के बीच दूरियां कम नहीं हुईं। हालांकि अब दोनों वर्गों के लोगों का मानना है कि नफरत को भूलकर आगे बढ़ने के लिए कोशिश करने की जरूरत है।
kawal case Muzaffarnagar: on this  day before seven years district was burnt in fire of riots
कवाल कांड - फोटो : अमर उजाला

बेटे खोए, अब कोर्ट के लगा रहे चक्कर 
27 अगस्त 2013 को कवाल में नजदीकी गांव मलिकपुरा के गौरव और उसके ममेरे भाई सचिन की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी। करीब साढ़े पांच साल चली कानूनी लड़ाई के बाद इस हत्याकांड में नामजद मुजस्सिम और मुजम्मिल पुत्र नसीम, फुरकान पुत्र फजला, जहांगीर, नदीम पुत्र सलीम, अफजाल व इकबाल पुत्र बुंदू को बीती आठ फरवरी को आजीवन कारावास हो चुकी है।

मुजम्मिल बुलंदशहर जेल में है तथा बाकी सभी आगरा जेल में बंद है। दूसरे पक्ष के शाहनवाज की हत्या के मामले में गौरव और सचिन के छह परिजनों के खिलाफ भी मुकदमा चल रहा है। बेटों को गंवाने के बाद यह पूरा परिवार कोर्ट के चक्कर लगाने को मजबूर है।

kawal case Muzaffarnagar: on this  day before seven years district was burnt in fire of riots
गौरव की मां सुरेश - फोटो : अमर उजाला

सब कुछ खो गया, अब यहां रहकर क्या करें?
दोहरे हत्याकांड में मारे गए गौरव की मां सुरेश छह साल पहले की घटना को याद कर सुबक पड़ती हैं। वह बुधवार को होने वाले पुण्यतिथि के कार्यक्रम के लिए गांव आई हैं।

कहती हैं कि बेटे के जाने के बाद गांव में रहने का मन नहीं करता, इसलिए मुजफ्फरनगर में रहती हैं। गौरव के साथ काल का ग्रास बने सचिन के घर में उसकी मां और बहन घरेलू कामकाज में लगी हैं। कहती हैं कि अब बात करने को कुछ नहीं बचा। जब भी सचिन की याद आती है दिल तड़प उठता है। 

विज्ञापन
विज्ञापन
kawal case Muzaffarnagar: on this  day before seven years district was burnt in fire of riots
कवाल कांड - फोटो : अमर उजाला

आर्थिक तंगी के चलते बच्चों को नहीं भेज पाते स्कूल
सचिन और गौरव की हत्या में जेल गए चार परिवारों के सात लोगों के परिजन भी सजा भुगत रहे हैं। घटना में शाहनवाज की मौत हो गई थी, जबकि उसके भाई जहांगीर और नदीम जेल में हैं। जहांगीर की पत्नी व छोटी बच्ची है। इनके साथ जेल गए अफजाल के भी छह बच्चे हैं। घर में कमाने वाला कोई नहीं। पत्नी का कहना है कि जैसे-तैसे गुजर हो रही है। आर्थिक तंगी के चलते बच्चे स्कूल भी नहीं जाते।

दूसरे भाई इकबाल की पत्नी चार बच्चों के साथ मायके गई हुई है। एक छोटे से घर तीन परिवार रहते हैं। जेल गए फुरकान के भी पांच छोटे बच्चे हैं। मुजस्सिम और मुजम्मिल भाई हैं। इनमें मुजस्सिम शादीशुदा है और उसके चार बच्चे हैं। कमाने वाला कोई नहीं, इसलिए सभी परिवार किसी तरह गुजर कर रहे हैं। 

विज्ञापन
kawal case Muzaffarnagar: on this  day before seven years district was burnt in fire of riots
शाहनवाज के पिता सलीम - फोटो : अमर उजाला

प्राण तो निकल गए, अब तो सांस बाकी है
कवाल कांड में मारे गए शाहनवाज के पिता सलीम कानूनी लड़ाई लड़ते हुए थक चुके हैं। एक बेटे की मौत और दो बेटों के जेल जाने से बुरी तरह टूट गए हैं। कहते हैं कि 75 साल से ज्यादा की उम्र हो गई। प्राण तो निकल चुके हैं, अब तो बस सांस बाकी है।

शहर से लौटते समय कवाल बस स्टैंड पर मिले सलीम ने बताया कि बेटे शाहनवाज के हत्यारोपियों को जमानत मिलने के बाद वह बुरी तरह टूट गए हैं। अब तो उन्हें अल्लाह का ही भरोसा है।

अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed