कवाल कांड: जब मुजफ्फरनगर पर टिकी थी पूरे देश की नजरें, नफरत को भूलकर आगे बढ़ने की कोशिश में पीड़ित
बेटे खोए, अब कोर्ट के लगा रहे चक्कर
27 अगस्त 2013 को कवाल में नजदीकी गांव मलिकपुरा के गौरव और उसके ममेरे भाई सचिन की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी। करीब साढ़े पांच साल चली कानूनी लड़ाई के बाद इस हत्याकांड में नामजद मुजस्सिम और मुजम्मिल पुत्र नसीम, फुरकान पुत्र फजला, जहांगीर, नदीम पुत्र सलीम, अफजाल व इकबाल पुत्र बुंदू को बीती आठ फरवरी को आजीवन कारावास हो चुकी है।
मुजम्मिल बुलंदशहर जेल में है तथा बाकी सभी आगरा जेल में बंद है। दूसरे पक्ष के शाहनवाज की हत्या के मामले में गौरव और सचिन के छह परिजनों के खिलाफ भी मुकदमा चल रहा है। बेटों को गंवाने के बाद यह पूरा परिवार कोर्ट के चक्कर लगाने को मजबूर है।
सब कुछ खो गया, अब यहां रहकर क्या करें?
दोहरे हत्याकांड में मारे गए गौरव की मां सुरेश छह साल पहले की घटना को याद कर सुबक पड़ती हैं। वह बुधवार को होने वाले पुण्यतिथि के कार्यक्रम के लिए गांव आई हैं।
कहती हैं कि बेटे के जाने के बाद गांव में रहने का मन नहीं करता, इसलिए मुजफ्फरनगर में रहती हैं। गौरव के साथ काल का ग्रास बने सचिन के घर में उसकी मां और बहन घरेलू कामकाज में लगी हैं। कहती हैं कि अब बात करने को कुछ नहीं बचा। जब भी सचिन की याद आती है दिल तड़प उठता है।
आर्थिक तंगी के चलते बच्चों को नहीं भेज पाते स्कूल
सचिन और गौरव की हत्या में जेल गए चार परिवारों के सात लोगों के परिजन भी सजा भुगत रहे हैं। घटना में शाहनवाज की मौत हो गई थी, जबकि उसके भाई जहांगीर और नदीम जेल में हैं। जहांगीर की पत्नी व छोटी बच्ची है। इनके साथ जेल गए अफजाल के भी छह बच्चे हैं। घर में कमाने वाला कोई नहीं। पत्नी का कहना है कि जैसे-तैसे गुजर हो रही है। आर्थिक तंगी के चलते बच्चे स्कूल भी नहीं जाते।
दूसरे भाई इकबाल की पत्नी चार बच्चों के साथ मायके गई हुई है। एक छोटे से घर तीन परिवार रहते हैं। जेल गए फुरकान के भी पांच छोटे बच्चे हैं। मुजस्सिम और मुजम्मिल भाई हैं। इनमें मुजस्सिम शादीशुदा है और उसके चार बच्चे हैं। कमाने वाला कोई नहीं, इसलिए सभी परिवार किसी तरह गुजर कर रहे हैं।
प्राण तो निकल गए, अब तो सांस बाकी है
कवाल कांड में मारे गए शाहनवाज के पिता सलीम कानूनी लड़ाई लड़ते हुए थक चुके हैं। एक बेटे की मौत और दो बेटों के जेल जाने से बुरी तरह टूट गए हैं। कहते हैं कि 75 साल से ज्यादा की उम्र हो गई। प्राण तो निकल चुके हैं, अब तो बस सांस बाकी है।
शहर से लौटते समय कवाल बस स्टैंड पर मिले सलीम ने बताया कि बेटे शाहनवाज के हत्यारोपियों को जमानत मिलने के बाद वह बुरी तरह टूट गए हैं। अब तो उन्हें अल्लाह का ही भरोसा है।