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कारगिल विजय दिवस: मेरठ के पांच बेटों ने कारगिल में जान देकर चुकाया मातृभूमि का कर्ज, परिजनों को आज भी है फख्र

Mon, 26 Jul 2021 04:48 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Mon, 26 Jul 2021 04:48 PM IST
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Kargil Vijay Diwas: Five jawan of Meerut sacrifice their lives for Mother India
करगिल विजय दिवस - फोटो : Social media

मेरठ के पांच सपूतों की बहादुरी के किस्से आज भी कारगिल में सुनाई देते हैं। हर साल 26 जुलाई को कारगिल विजय दिवस पर मातृभूमि की रक्षा करते हुए शहीद हुए इन जाबांजों को नमन किया जाता है।



21 साल पहले कारगिल की लड़ाई में इन जांबाजों को खोने वाले परिवारों के सदस्यों का सीना अब भी गर्व से चौड़ा हो जाता है। इन वीरों सहित अन्य जवानों की शहादत से ही कारगिल में फतह मिली और वहां फिर से तिरंगा लहराया। इन शहीदों के परिवारों का ऋण ये देश कभी नहीं चुका पाएगा। आइए कारगिल दिवस पर इन शहीदों को नमन करें।

Kargil Vijay Diwas: Five jawan of Meerut sacrifice their lives for Mother India
आठ साल की थी बेटी जब योेगेंद्र हुए थे शहीद - फोटो : Amar Ujala Meerut

जब योगेंद्र शहीद हुए थे, उनकी बेटी आठ साल की थी
कारगिल युद्ध में टाइगर हिल पर पाकिस्तानी सेना ने सबसे ज्यादा नुकसान किया। दुश्मन 18 हजार फीट की ऊंचाई पर और हमारे जवान नीचे। वे पत्थर भी फेंकते तो गोली की तरह लगता। उधर से मशीनगन चल रही थी। कितने ही अफसर-जवान शहीद हो गए थे। योगेंद्र यादव की बटालियन को टास्क दिया गया। ग्रेनेडियर योगेंद्र सिंह यादव ने अपने सात साथियों के साथ प्वाइंट पर पहुंचकर पाकिस्तानी बंकरों को ध्वस्त किया।

उन्होंने दुश्मन के 17 जवानों को मौत के घाट उतार दिया। पांच जुलाई 1999 की शाम को दुश्मन की जवाबी गोलीबारी में वो शहीद हो गए। उनकी वीरता के लिए वीर चक्र मेडल दिया गया। उनकी पत्नी वीर नारी उर्मिला देवी बताती हैं, उनकी शहादत के समय बड़ी बेटी ज्योति महज आठ साल की थी। बेटा संदीप सात और दीपक चार साल का था। बेटे संदीप और दीपक बताते हैं कि पिता की बहादुरी पर उन्हें फख्र होता है। 

Kargil Vijay Diwas: Five jawan of Meerut sacrifice their lives for Mother India
तिरंगा फहराकर शहीद हुए मेजर मनोज तलवार - फोटो : Amar Ujala Meerut

तिरंगा फहराकर शहीद हुए मेजर मनोज तलवार
मवाना रोड स्थित डिफेंस कालोनी ए-34 निवासी मेजर मनोज तलवार की फरवरी 1999 में फिरोजपुर पंजाब में तैनाती हुई। लेकिन वे देश के लिए कुछ करना चाहते थे, उन्होंने सियाचिन में नियुक्ति की मांग कर दी। कारगिल में युद्ध हुआ तो उनकी बटालियन को टुरटुक में भेजा गया।

13 जून को उन्होंने कारगिल सेक्टर टुरटुक में तिरंगा फहरा दिया। इसी बीच दुश्मन की तोप के गोले के वार से वह शहीद हो गए। उनके पिता रिटायर्ड कैप्टन पीएस तलवार का कुछ दिन पहले ही निधन हो चुका है। मां ऊषा तलवार का निधन कई वर्ष पहले हो गया था। परिवार में छोटे भाई और बहनें हैं। 

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दुश्मनों पर भारी पड़े यशवीर सिंह - फोटो : Amar Ujala Meerut

दुश्मनों पर भारी पड़े यशवीर सिंह
मूलरूप से बागपत के सिरसली और अब रोहटा बाईपास पर रहने वाली वीर नारी मुनेश देवी बताती हैं कि उनके पति हवलदार यशवीर सिंह की बटालियन को तोलोलिंग का टास्क दिया गया था। 12 जून को टू-राजपूताना राइफल ने मेजर विवेक गुप्ता के नेतृत्व में 90 जवानों ने इस प्वाइंट पर हमला बोल दिया।

प्वाइंट 4950 पर कब्जे को भीषण युद्ध हुआ। हवलदार यशवीर सिंह ने सीने पर गोलियां लगने के बावजूद ग्रेनेड के साथ पाकिस्तानी सेेेना के बंकरों पर हमला कर दिया। 40-50 दुश्मनों को मारकर वे शहीद हो गए। 13 जून 1999 को तोलोलिंग पर भारतीय सेना ने तिरंगा फहरा दिया। जब वे शहीद हुए थे तो छोटा बेटा आठ साल और बड़ा 12 साल का था। 

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फतह के बाद शहीद हुए सत्यपाल सिंह - फोटो : Amar Ujala Meerut

फतह के बाद शहीद हुए सत्यपाल सिंह
मूलरूप से गढ़मुक्तेश्वर के लुहारी गांव निवासी लांसनायक सत्यपाल सिंह का जनवरी 1999 में जम्मू तबादला हुआ था। इसी बीच कारगिल की जंग शुरू हो गई। उनकी बटालियन सेकेंड राजपूताना राइफल्स को कारगिल पहुंचने का आदेश मिला।

तोलोलिंग जीतने के बाद 28 जून को दुश्मनों से लड़ते हुए वो द्रास सेक्टर में शहीद हो गए। बड़ा बेटा पुलकित साढ़े तीन साल और बेटी दिव्या ढाई साल की थी। 

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