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Kanwar Yatra 2025: पिता की सांसों के लिए भोलेनाथ से मांगी मन्नत, अब हर कदम जमीन पर लेटकर निभा रहा वादा

Thu, 10 Jul 2025 12:31 PM IST
डिंपल सिरोही न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बागपत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बागपत Published by: डिंपल सिरोही Updated Thu, 10 Jul 2025 12:31 PM IST
सार

Kanwar Yatra News: सोनीपत के दीपक ने पिता के जीवन के लिए भोलेनाथ से मन्नत मांगी, अब वह हरिद्वार से जमीन पर लेटकर कांवड़ ला रहा है। उसकी यह यात्रा श्रद्धा, प्रेम और संकल्प की मिसाल बन गई है।

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Kanwar Yatra 2025: Son Rolls on Ground with Kanwar to Fulfill Promise for Fathers Life
लेटकर कांवड़ लाता शिवभक्त दीपक - फोटो : अमर उजाला

बस मेरे पापा ठीक हो जाएं भोलेनाथ...! मैं अपना सब कुछ आपके चरणों में अर्पित कर दूंगा। यह सिर्फ प्रार्थना नहीं थी, बल्कि एक बेटे की भगवान शिव से अपने पिता की जिंदगी के लिए अंतिम फरियाद, जब उसके पिता अस्पताल के बेड पर जिंदगी और मौत से जूझ रहे थे।



सोनीपत जिले के नाहरी निवासी दीपक के पिता दिल्ली के नरेला स्थित अस्पताल में भर्ती थे। डॉक्टरों और नर्सों तक ने जवाब दे दिया था-'उम्मीद बहुत कम है।' थके-हारे परिवार को जब दवा नहीं बचा सकी, तब दीपक ने भोलेनाथ से संकल्प लिया-अगर पापा बच गए, तो मैं कांवड़ लाऊंगा, वो भी लेटकर, अपनी देह को कष्ट देकर। 

Kanwar Yatra 2025: Son Rolls on Ground with Kanwar to Fulfill Promise for Fathers Life
लेटकर कांवड़ लाता शिवभक्त दीपक - फोटो : अमर उजाला

भोलेनाथ ने सुनी पुकार, लौटी पिता की सांसें
शिवरात्रि से पहले मानो चमत्कार हुआ। पिता की हालत सुधरने लगी, अस्पताल से छुट्टी मिली और उनके चेहरे की मुस्कान वापस आ गई। दीपक अब अपने संकल्प को निभाने निकल पड़ा।

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Kanwar Yatra 2025: Son Rolls on Ground with Kanwar to Fulfill Promise for Fathers Life
लेटकर कांवड़ लाता शिवभक्त दीपक - फोटो : अमर उजाला

जमीन पर लेटकर निभा रहा संकल्प
हरिद्वार से बड़ौत की ओर दीपक बिना किसी सहारे, लाठी या साधन के खुद को भूमि पर लेटाता हुआ कांवड़ लेकर चल रहा है। कुछ दूरी तक पेट के बल लेटता है, फिर खड़ा होकर कुछ कदम चलता है, फिर लेटता है और उसी जगह से फिर से इस प्रक्रिया को दोहराता है।  यही क्रम दोहराते हुए वह बड़ौत पहुंच गया है।

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Kanwar Yatra 2025: Son Rolls on Ground with Kanwar to Fulfill Promise for Fathers Life
लेटकर कांवड़ लाता शिवभक्त दीपक - फोटो : अमर उजाला

जब बड़ौत पहुंचने पर रास्ते में लोगों ने दीपक से पूछा कि भाई इतनी कठिन तपस्या क्यों? तो उसकी आंख में आंसू थे और कांपती आवाज में जवाब दिया कि पिता की सांसें उधार थीं भोलेनाथ से... अब हर कदम उन्हीं को लौटाने निकला हूं..' यह सुनकर वहां खड़े लोगों की आंखें नम हो गईं।' 

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Kanwar Yatra 2025: Son Rolls on Ground with Kanwar to Fulfill Promise for Fathers Life
लेटकर कांवड़ लाता शिवभक्त - फोटो : संवाद

श्रद्धा, संकल्प और पुत्रधर्म की जीवंत मिसाल
दीपक की यात्रा सिर्फ एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि श्रद्धा, परिवार के प्रति प्रेम और भोलेनाथ पर अटूट आस्था की जीवंत तस्वीर बन गई है। यह कहानी बताती है कि जब श्रद्धा सच्ची हो, तो भोलेनाथ 'शंकर' से 'संजीवनी' बन जाते हैं।

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