चलो पुरा महादेव, जहां रहते हैं देवों के देव, मिटने लगेगी पीड़ा, बोलो तो हर हर महादेव...की गूंज के साथ कांवड़िए शिव के जलाभिषेक के लिए बढ़ रहे हैं। आस्था और देशभक्ति के रंग के साथ कांवड़ यात्रा अपने चरम पर पहुंच गई है।
पुरा महादेव में परशुराम को मिला था शिव का वरदान, यहां मौजूद है रंग बदलने वाला अनूठा शिवलिंग
पुरा गांव आने वाला हर रास्ता इन दिनों आस्था और देशभक्ति के रंग में रंगा है। सबकी मंजिल एक है और सब शिव नाम का जाम करते हुए आगे बढ़ते जा रहे हैं। शिव के जयघोष के साथ देश की आन बान और शान तिरंगे लहराते हुए जलाभिषेक करने के लिए कतारों में खड़े हैं।
पैदल से लेकर डाक कांवड़िए के साथ दो ही रंग है, जिनमें एक आस्था और दूसरा देशभक्ति। सब एक सुर और एक नाद के साथ पुरा के श्री परशुरामेश्वर महादेव मंदिर की ओर बढ़े चले जा रहे हैं। शिवभक्त तिरंगा लेकर भारत माता के जयकारे लगाते हुए पहुंच रहे हैं। पुरा गांव में दूर तक केसरयिा रंग दिखाई दिया। भोले के भजनों के साथ देशभक्ति के गीत भी बज रहे हैं।
शिव ही सत्य है और सत्य ही शिव है। कई रूप और कई रंग हैं। महादेव दुष्टों का संहार करते हैं, लेकिन भक्तों के लिए उनके दरवाजे हमेशा खुले हैं। हिंडन नदी के किनारे बसे पुरा गांव पर भी नागेश्वर की कृपा बरसती है। श्री परशुरामेश्वर महादेव मंदिर में रंग बदलने वाला अनूठा शिवलिंग है। यहां जल चढ़ाने के लिए दूर दूर से शिवभक्त शिवरात्रि पर जल चढ़ाते हैं।
बुजुर्ग बताते हैं कि हिंडन नदी के किनारे कजरी वन में ऋषि जमदग्नि अपनी पत्नी रेणुका के साथ रहते थे। एक दिन हस्तिनापुर के राजा सहस्रबाहु शिकार खेलते हुए कजरी वन पहुंचे। कुटिया पर पहुंचे तो ऋषि मौजूद नहीं थे। राजा रेणुका के रूप पर मोहित हुए और जबरन उसे अपने साथ हस्तिनापुर ले गए। एक दिन राजा की पत्नी ने रेणुका को बंधन मुक्त कर दिया।