मुजफ्फरनगर में राष्ट्रीय लोकदल के उपाध्यक्ष जयंत चौधरी ने कहा कि मेरे बाबा ने सिखाया था कि दबे-कुचले लोगों की आवाज बनना। मेरे घर में यही संस्कार मिले हैं। भाषण के दौरान जयंत इतने भावुक हो गए कि पंडाल में बैठे लोग मौन हो गए। लोग उनकी बातों में इतना खो गए कि आंखों से आंसू छलक पड़े।
जाटलैंड में भावुक हुए जयंत..., जनता के छलके आंसू, बोले-दो बेटियां हैं, किसी बेटी के साथ अत्याचार नहीं देख सकता
गुरुवार को जीआईसी के मैदान में आयोजित लोकतंत्र बचाओ रैली में रालोद उपाध्यक्ष जयंत चौधरी ने कहा कि मेरी बहन हैं, दो बेटियां हैं, मैं बेटियों पर अत्याचार सहन नहीं कर सकता। यहां हिंदू संस्कृति को मानने वाले लोग बैठे हैं, मैं खुद आर्यसमाजी हूं, बताओ रात के अंधेरे में हमारे यहां अंतिम संस्कार होता है क्या? हाथरस में एक गरीब की बेटी की आवाज उठाने गया, मेरा यही कसूर था।
जयंत ने दिवंगत चौधरी चरणसिंह के समय से जुड़े बुजुर्गों के संबंधों को भी याद ताजा किया। कहा, जब बाबाजी आपको डांटते थे, तो दादी पुचकारती थी। कभी यह अहसास नहीं होने दिया कि हम एक परिवार के लोग नहीं है। मेरी बुआ आपके सुख-दुख में साथ रहीं। मुझे आप लोगों ने गोदी में खिलाया है। मै अपने परिवार के बीच हूं। आप लोगों के लिए मै एक नहीं, सौ लाठियां भी खाने को तैयार हूं।
माया त्यागी केस की याद दिलाते हुए जयंत ने कहा कि चौधरी चरणसिंह ने हमेशा अन्याय के खिलाफ आवाज उठाई। हमारा आपका खून अन्याय सहने वाला नहीं है। जयंत के ये बोल इतने भावुक करने वाले थे कि रैली में आने वाले बुजुर्गों के आंखों में आंसू छलक पड़े।
लंबे समय बाद लोग जयंत के साथ भावनात्मक रूप से जुड़ते हुए दिखाई दिए। रैली के माध्यम से जयंत चौधरी समाज को लोगों को यह संदेश देने में सफल रहे कि अत्याचार के खिलाफ लड़ाई लड़ने के लिए अब सबको आगे आना ही पड़ेगा।
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