आईएसआई को सेना की गोपनीय जानकारियां लीक करने के आरोप में पकड़े गए जवान कंचन सिंह के निजी बैंक खाते को सीज करा दिया गया है। खाते में जितनी भी ट्रांजेक्शन हुईं हैं, उन सभी का रिकॉर्ड निकलवा लिया गया है। कंचन के कोर्ट मार्शल की कार्रवाई में भी ट्रांजेक्शन की डिटेल अहम होगी। वहीं, लखनऊ में पूछताछ पूरी होने के बाद कंचन को मेरठ लाकर कोर्ट मार्शल की तैयारी की जाएगी। प्रारंभिक जांच में उस पर जासूसी के आरोप साबित हो चुके हैं।
सुंदरता के जाल में फंसाए जाते हैं सेना के जवान, जासूस कंचन के खाते में पाक से आए थे 7 लाख
सेना में जवान और अफसर को अपनी यूनिट को 35 प्वाइंट के बारे में जानकारी देनी होती है। मसलन, उसके कितने बैंक अकाउंट हैं। वो कितने मोबाइल और सिम का प्रयोग करता है। परिवार में कितने सदस्य हैं। इन्हीं जानकारियों को छुपाने के चलते कंचन सिंह सेना के टारगेट पर आ गया। दरअसल, छह महीने पहले एटीएस ने उत्तराखंड से आईएसआई के लिए जासूसी करने वाले जवान को पकड़ा था। उसके बाद से खुफिया एजेंसियां दूसरे जासूसों की तलाश में जुटी थीं। तीन महीने पहले कंचन निशाने पर आया था। सेना की खुफिया एजेंसी ने उसकी रेकी शुरू कर दी। इसके बाद सामने आया कि कंचन ने सेना को जो जानकारियां दी हुई हैं, उनमें अंतर आ रहा है।
पाकिस्तान से खाते में आए सात लाख
बागेश्वर (उत्तराखंड) के गढ़िया गांव निवासी कंचन ने अपने दो बैंक अकाउंट की जानकारी दी थी। ये दोनों सरकारी बैंक में हैं। इनमें से एक सैलरी अकाउंट है। इनके अलावा कंचन ने एक निजी बैंक में भी अकाउंट खुलवा लिया था। इसी बैंक अकाउंट में सात लाख रुपये का ट्रांजेक्शन आईएसआई एजेंट द्वारा किए जाने की जानकारी सामने आई।
ये ट्रांजेक्शन पाकिस्तान से की गई थी। कंचन के इस खाते में कई बार ट्रांजेक्शन हुआ। सेना ने इस बैंक खाते को सीज करा दिया है। बैंक खाते के खुलने से लेकर अब तक की सारी ट्रांजेक्शन का ब्यौरा ले लिया गया है। सैन्य सूत्रों ने बताया कि कोर्ट मार्शल की प्रक्रिया में लंबा समय लगता है। उसमें पुख्ता सुबूत पेश करने होते हैं। ऐसे में ये सबसे अहम सबूत होगा।
अब सोशल मीडिया पर पहचान नहीं खोलेंगे फौजी
आईएसआई देश के सभी छावनी क्षेत्रों में अपना नेटवर्क बनाना चाहती है। इसके लिए वो तरह-तरह से जवानों को लालच देते हैं। कई बार पाकिस्तान से आई रांग कॉल के जरिए भी वे शिकार तलाशते हैं। कई बार फेसबुक से नंबर हासिल करके कॉल की जाती है। सैन्य अफसरों का कहना है कि कंचन भी इसी तरह से जाल में फंसा। कंचन के अलावा बीएसएफ का सिपाही अच्युतानंद मिश्रा और नागपुर के रक्षा अनुसंधान में इंजीनियर निशांत अग्रवाल भी सोशल साइट्स के जरिए निशाना बने। ऐसे में फौजियों को सेना के अफसरों ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। साफ कहा गया है कि कोई भी फौजी सोशल साइट्स पर वर्दी में फोटो अपलोड नहीं करेगा। सेना की पहचान भी नहीं डालेगा।