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सहारनपुर में दलित व ठाकुरों के बीच लौट आया वो प्रेम, तस्वीरें जरूर देखें

Tue, 30 May 2017 05:15 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ सहारनपुर
अमर उजाला ब्यूरो/ सहारनपुर Updated Tue, 30 May 2017 05:15 PM IST
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In Saharanpur, the return of Dalits and Thakurs came in love, see pictures
सहारनपुर में लौट आई खुशियां

सहारनपुर के शब्बीरपुर गांव में बेशक अभी भी संगीनों के साए गली-गली में छाए हों, लेकिन गांव अब दहशत छोड़ शांति और सामान्य की ओर चल पड़ा है। दलितों एवं राजपूत दोनों ही समाज के लोग अपने-अपने कामों में लग गए हैं। गांव में स्थिति सामान्य करने के लिए दोनों ही समाज के लोग कदम आगे बढ़ा रहे हैं। दलित समाज के लोगों ने खेतों में काम करना भी शुरू कर दिया है और अपने पशुओं तथा जले हुए घरों को भी संवारना शुरू कर दिया है।

In Saharanpur, the return of Dalits and Thakurs came in love, see pictures
खेतों में काम करती महिलाएं

जातीय संघर्ष की आग में पिछले 25 दिन से झुलस रहे शब्बीरपुर ने शांति की ओर कदम बढ़ाना शुरू कर दिया है। गांव के लोग भी अब शांति चाहते हैं और कह रहे हैं कि बहुत बदनामी हो गई गांव की, आगे कब तक ऐसा चलता रहेगा। गांव के लोग दहशत को छोड़ अपने-अपने काम में जुट गए हैं। खेत-खलिहानों में फिर से चहल शुरू हो गई है। गांव के युवा गांव में राजनीति नहीं गांव की तरक्की चाहते हैं और किसी के बहकावे में न आने की अपील कर रहे हैं। 

In Saharanpur, the return of Dalits and Thakurs came in love, see pictures
सहारनपुर के लोगों में दहशत खत्म हो गई है

गांव के नौजवानों की अपील का असर यह हुआ कि आज कुछ दलित महिलाऐं गांव के एक किनारे पर दूसरे पक्ष के खेतों में धान की रोपाई करती देखी गईं, वहीं कुछ दलित पक्ष के लोग आज गांव में अपने पशुओं को नहलाते तथा टूटे पड़े घरों के दरवाजे की मरम्मत एवं अन्य दूसरे कार्यों में व्यस्त दिखाई दिए।

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शब्बीरपुर गांव का एक कच्चा मकान

वहीं गांव के दलित बुजुर्ग सुरेश कहते हैं कि हम दोनों ही पक्षों को इसी गांव में रहना है जैसा भाई चारा हमारे यहां पहले था ऐसा ही दोबारा कायम करना चाहिए। ठाकुर जगमेर सिंह कहते हैं कि दलित और राजपूत एक दूसरे के बिना नहीं रह सकते, भाईचारा तो बनाना ही पड़ेगा।

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दस दिन पहले ऐसा था सहारनपुर का माहौल

पुलिस अधीक्षक देहात विद्या सागर मिश्र का कहना है कि अब गांव पूरी तरह से शांत है दोनों पक्षों के ग्रामीणों ने खेतों में कार्य करना भी शुरू कर दिया है। किसी को कोई डर या कोई दहशत नहीं है।

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