Meerut: आईएएस अधिकारी नारयणी भाटिया बनीं अमर उजाला की अतिथि संपादक, बोलीं-अखबार जीवन का हिस्सा
नवरात्र में महिला शक्ति को ध्यान में रखते हुए शारदीय नवरात्र की पूर्व संध्या पर आईएएस अधिकारी नारायणी भाटिया को अमर उजाला मेरठ में अतिथि संपादक बनाया गया।
विस्तार
नवरात्र में देवी विभिन्न स्वरूपों की पूजा होती है। महिला शक्ति को ध्यान में रखते हुए शारदीय नवरात्र की पूर्व संध्या पर अमर उजाला कार्यालय में भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) की प्रशिक्षु अधिकारी नारायणी भाटिया को अतिथि संपादक बनाया गया। उन्होंने इस दौरान खबरों को लेकर अपने महत्वपूर्ण सुझाव दिए। आज के दिन के लिए अखबार में खासतौर पर किस तरह की खबरों को प्राथमिकता मिले, इस पर चर्चा की।
उन्होंने कहा कि अखबार जीवन का अहम हिस्सा है। जीवन में सफलता के लिए पढ़ना, सीखना बहुत जरूरी है। महिलाएं कहीं भी कमतर नहीं हैं। समाचार पत्र ही नहीं समाज के हर क्षेत्र में महिलाओं को पुरुषों के बराबर दर्जा मिलना चाहिए। हर व्यक्ति की सोच और पसंद अलग-अलग होती है। उनकी सफलता में समाचार पत्रों की अहम भूमिका रही है।
उन्होंने यूपीएससी की परीक्षा के लिए खूब अखबार पढ़े और अखबारों से ही देश की सबसे बड़ी परीक्षा में दो बार कामयाबी हासिल की। वर्ष 2022 में आईपीएस में चयन हुआ, मगर रुचि प्रशासनिक सेवा में रहीं, 2023 में आईएएस में चयन हुआ। उनका कहना था कि समाज को इस दौर में सकारात्मक सोच की आवश्यकता है। ऐसे में प्रेरणादायक खबरों को विशेष बढ़ावा दिया जाना चाहिए।
प्रोफाइल
नाम : नारायणी भाटिया
2022 बैच की आईपीएस,
2023 बैच की आईएएस
वर्तमान दायित्व : ज्वाइंट मजिस्ट्रेट
शिक्षा : आईआईटी दिल्ली से बीटेक
निवासी : नई दिल्ली
ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं में बहुत प्रतिभा
मुझे इस सेवा में आए हुए अभी कुछ ही महीने हुए हैं। इस दौरान मेरी तैनाती खरखौदा ब्लॉक में रही है। गांव-गांव घूमी हूं। मैंने देखा कि गांव की महिलाओं में काफी प्रतिभा है। वे अपने स्तर से ही समूह बनाकर छोटे-छोटे काम कर रही हैं। मेरी इच्छा है कि उनके लिए भविष्य में कुछ कर सकूं। समाज के सभी प्रमुख वर्गों का यह उद्देश्य होना चाहिए। ऐसे लोगों को बड़े मंच दें।
साइबर सुरक्षा भी अहम मुद्दा
वर्तमान दौर में महिलाओं के लिहाज से साइबर सुरक्षा भी अहम मुद्दा है। घटनाओं और साइबर क्राइम के मामलों में जागरूकता भी बहुत जरूरी है, जिससे कि ऐसी घटनाओं से बचा जा सके। समाज में तमाम मुद्दे ऐसे हैं, जिसमें जागरूकता से ही बचाव संभव है।