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'लगेंगी आपको सदियां हमें भुलाने में...' कवि 'नीरज' का मेरठ से था खास नाता, देखें तस्वीरें

Fri, 20 Jul 2018 02:23 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Updated Fri, 20 Jul 2018 02:23 PM IST
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Gopaldas Neeraj conection with Meerut, has been a teacher in this college of the city
गोपालदास नीरज - फोटो : अमर उजाला
इतने बदनाम हुए हैं हम तो इस जमाने में, लगेंगी आपको सदियां हमें भुलाने में..। काव्य जगत में शब्दों का स्वर्णकाल सफर पूरा करने वाले पद्मभूषण महाकवि डॉ. गोपालदास नीरज के  महाप्रयाण से संपूर्ण साहित्य संसार में शोक की लहर दौड़ गई। शब्दों के इस विशाल हिमालय ने कई बार मेरठ के काव्य प्रेमियों के गले को अपने गीतों से तर किया। मेरठ की मिट्टी से नीरज का खास लगाव था। 

 

अमर उजाला के विशाल अभियान 'मां तुझे प्रणाम' के तहत जिमखाना मैदान में हुए कवि सम्मेलन का मंच उनकी उपस्थिति का साक्षी बना। स्वास्थ्य खराब होने के बाद भी नीरज अंत तक मंच पर बैठे और रात दो बजे अपना काव्यपाठ शुरू किया। उन्हें सुनने के लिए श्रोता रातभर कुर्सियों पर जमे रहे। माइक संभालते ही नीरज ने अपने प्रख्यात गीत ‘कारवां गुज़र गया गुबार देखते रहे’ पढ़ा तो श्रोताओं ने तालियों की गड़गड़ाहट से उनका स्वागत किया। इसके बाद तो उनके प्रेमगीतों का सिलसिला रात के तीसरे पहर तक जारी रहा। इसमें केवल नीरज के गीत थे और उन्हें दिल से सुनने वाले श्रोता।

वाणी फाउंडेशन की काव्य संध्या स्थगित

Gopaldas Neeraj conection with Meerut, has been a teacher in this college of the city
गोपाल दास 'नीरज' - फोटो : अमर उजाला

वाणी फाउंडेशन की ओर से स्व. विश्वम्भर सहाय प्रेमी जी की 119वीं जयंती पर जगदीश मंडप में काव्य संध्या का आयोजन था। आयोजन शुरू होने से पहले ही कवि गोपलदास नीरज के देहांत की सूचना आ गई, इसके कारण काव्य संध्या स्थगित कर दी गई। इस दौरान कवि गजेंद्र प्रियांशु ने उनके चर्चित गीत कारवां गुजर गया गुबार देखते रहे सुनाकर उन्हें श्रृद्धांजलि अर्पित की। मौन व शोकसभा के साथ आयोजन स्थगित कर दिया गया। आयोजन की नई तिथि की घोषणा दो-तीन दिनों में होगी। आयोजन सचिव अजय प्रेमी व अन्य कवियों ने कार्यक्रम स्थगन की सूचना दी। 

उन्हें भूलना असंभव

Gopaldas Neeraj conection with Meerut, has been a teacher in this college of the city
कवियित्री सीता सागर व कवि हरिओम पवांर - फोटो : अमर उजाला
वरिष्ठ कवि डॉ. हरिओम पवार के मुताबिक काव्य जगत का सबसे बड़ा आशीषदाता,साहित्य और गीतों के राजा कवि गोपालदास नीरज चले गए। आने वाली पीढ़ियां उनके गीतों को कभी नहीं भुला पाएंगी। उनके साथ कई मंचों को साझा कर चुका हूं। वो मंच पर नए कवियों को पूरा सम्मान देते थे। उनका जाना काव्य समाज की बड़ी हानि है। कवियत्री सीता सागर का कहना है कि कवि गोपालदास नीरज बेशकीमती मोती थे। जो साहित्य जगत में चमकते रहे। आज अलौकिक प्रकाश में लुप्त हो गए। उनका जाना बड़ी क्षति है। हमें बहुत दुख है। 
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हिंदी मंचों के थे सिरमौर 

Gopaldas Neeraj conection with Meerut, has been a teacher in this college of the city
गोपाल दास नीरज - फोटो : file
कवि डॉ. सुनील जोगी  कहते हैं कि नीरज जी हिंदी मंचों के सिरमौर कवि थे। उन्होंने करीब 80 साल तक हिंदी मंचों की सेवा की। फिल्मों में भी वो हिट रहे। मेरा नाम जोकर से लेकर तमाम फिल्मों के लिए उन्होंने सुपरहिट गीत लिखे। इसके बाद भी उनका अंदाज फकीराना था। उनके साथ का एक संस्मरण जो कभी नहीं भूल सकता। सर्दी के दिनों में ग्रेटर नोएडा में एक कवि सम्मेलन चल रहा था। नीरज जी मौजूद थे। आयोजन में हमें शॉल दिया गया। नीरज जी उस शॉल से स्वयं को ढककर ऐसे बैठ गए जैसे कोई नई दुल्हन शरमाई-सकुचाई सी बैठी हो। उन्हें देखकर मैंने जब यह बात कही तो वो मुस्कुरा दिए।
 
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साहित्य का समंदर थे नीरज

Gopaldas Neeraj conection with Meerut, has been a teacher in this college of the city
गोपाल दास नीरज - फोटो : अमर उजाला

बाराबंकी के कवि गजेंद्र प्रियांशु के मुताबिक  नीरज जी का जाना शब्द साहित्य के संसार के एक सितारे का अस्त हो जाना है। मंचों पर कई बार उनसे बहुत कुछ सीखने का अवसर मिला। दो से तीन बार उनसे भेंट हुई। वो साहित्य का समंदर थे और छोटे कवियों को हमेशा स्नेह देते थे। उनके गीत और प्यार अविस्मरणीय है।


 
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