फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

मखदूमपुर गंगा घाट पर देखिए विदेशी पक्षियों की अठखेलियां, तस्वीरें

Fri, 19 Jan 2018 07:12 PM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
यूपी डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Updated Fri, 19 Jan 2018 07:12 PM IST
विज्ञापन
Foreign birds make Makhdumpur Ganga Ghat home, see photos
ब्रह्मी - फोटो : अमर उजाला

प्रवासी पक्षियों को हस्तिनापुर का वन्य क्षेत्र भाया है। साइबेरियन और यूरेशिया के पक्षियों ने इस समय मखदूमपुर और खेड़ी घाट पर डेरा डाला हुआ है। जो सुबह खाने के बाद पूरे दिन टापूओं पर आराम व पानी में अठखेलियां करते नजर आते हैं। मौसम अनुकूल होने के चलते करीब 60 से 70 तरह की प्रजातियों के ये प्रवासी पक्षी हस्तिनापुर के वन्य क्षेत्र व गंगाघाट पर बसेरा डाले हुए हैं। जिसमें  पिनटेल डक, ब्लू थोरेट, शॉवलर, विजिन, क्रेन, ब्रह्मी डक, आसानी से देखी जा सकती हैं।

Foreign birds make Makhdumpur Ganga Ghat home, see photos
विदेशी पक्षी - फोटो : अमर उजाला

साइबेरिया, यूरेशिया के पक्षी लद्दाख और इराक की कई हजार किलोमीटर की दूरी तय कर भारत में प्रवास करते हैं। यहां का सर्दियों का मौसम अनुकूल होने के चलते ये सैलानी पक्षी नवंबर से फरवरी तक यहां प्रवास करते हैं। मेरठ में प्रवासी पक्षियों की कमी नहीं हैं। हस्तिनापुर वन्य क्षेत्र, मखदूमपुर व खेड़ी घाट पर बसेरा डालने वाले ये पक्षी सुबह-शाम को ही खाने के तलाश में तट पर आते हैं। जबकि दोपहर के समय ठंडा रहने के लिए पानी में अठखेलियां करते हैं तो टापूओं पर रेत में आराम करते हैं।

एक सप्ताह का सफर

Foreign birds make Makhdumpur Ganga Ghat home, see photos
विदेशी पक्षी - फोटो : अमर उजाला

इन दिनो मखदूमपुर व खेड़ी घाट पर ब्रह्मी डक (चकवा-चकवी), विजिन (परा), रेड कैपर (लालसर), काज, ग्रेलेन गीज, किंगफिशर, शॉवलर आदि पक्षियों का डेरा है। पक्षी विज्ञानी रजत भार्गव ने बताया कि मखदूमपुर गंगाघाट प्रवासी पक्षियों के लिए बेहतर माना जाता है। एक रिसर्च के अनुसार जब यह प्रवासी पक्षी नवंबर माह में यहां आते हैं, तो इन्हें करीब एक सप्ताह का समय यहां तक आने में लगता है। इनका वजन उस समय कम होता है। जबकि फरवरी में जाते समय इनका वजन काफी ज्यादा होता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

तीन दिन में हिमालय पार

Foreign birds make Makhdumpur Ganga Ghat home, see photos
विदेशी पक्षी - फोटो : अमर उजाला

पक्षी विज्ञानी का कहना है कि काज पक्षी कई हजार किलोमीटर की दूरी तय करता है। यह तीन दिनों में हिमालय क्षेत्र को पार करता है और इस दौरान कुछ नहीं खाता-पीता है। उसके बाद यहां तक पहुंचता है। यहां वह दोस्ताना नजर आते हैं। किंगफिशर अपने शिकार के समय उसके ऊपर उड़ता रहता है। पलक झपकते ही शिकार को चोंच में दबाकर चला जाता है।

विज्ञापन

यहां संरक्षण की रुचि कम

Foreign birds make Makhdumpur Ganga Ghat home, see photos
विदेशी पक्षी - फोटो : अमर उजाला

रजत भार्गव के अनुसार हमारे यहां पक्षियों के संरक्षण को लेकर रुचि कम है। वहीं, दूसरी ओर विदेशों में सरकार द्वारा अलग से प्रत्येक नागरिक के लिए पक्षी संरक्षण की पहल की जाती है। यूनिवर्सिटी में भी वही पुराने शोधों पर काम चलता रहता है। नई शोध नहीं होतीं। उनका मानना है कि भारत सरकार द्वारा फंडिंग व सही व्यवस्था पक्षियों पर शोध को लेकर हो तो अच्छे परिणाम मिलेंगे। पोखर, तालाबों का संरक्षण भी बेहद जरूरी है।

अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed