मेरठ से सटे परीक्षितगढ़ में जल निकासी को लेकर गांव में होने वाले छोटे-छोटे झगड़ों से आए दिन गांव का माहौल खराब रहता, लेकिन जल निकासी का कोई उचित प्रबंध न होने के कारण सिकंदरपुर गांव का हर परिवार परेशान था।
ऐसे, में इस गांव की महिलाओं ने पहले नलों के आगे छोटे गड्ढे खोदे और बाद में धीरे-धीरे आंगन में सब्जियां उगानी शुरू कर दी। एक-दूसरे को देख गांव के प्रत्येक घर के आंगन में किचन गार्डन बन गया और आज जल निकासी की समस्या गांव से पूरी तरह समाप्त हो गई।
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गांव में सब्जियां की निराई गुड़ाई करती महिला
- फोटो : अमर उजाला
सिकंदरपुर मेरठ जिले का आखिर गांव है और जिले से लगभग 50 किमी दूर खादर क्षेत्र का यह पिछड़ा हुआ गांव है। इस गांव में लगभग आठ साल पहले तक जल निकासी की समस्या से आए दिन गांव में झगड़े की समस्या बनी रहती थी। झगड़े की समस्या को देखते हुए गांव के 135 परिवार के लोगों ने आपस में बैठकर समस्या को सुलझाने का प्रयास किया।
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गांव में उगी सब्जियां
- फोटो : अमर उजाला
महिलाओं ने घर के आंगन में सब्जियां उगानी शुरू कर दी और घरों से निकलने वाला पानी किचन गार्डन में उपयोग होने लगा। जल निकासी की इस समस्या को महिलाओं ने बखूबी भूनाया और अपनी आय के स्रोत में इसे तब्दील किया। इस कार्य को करने में महिलाओं को कोई सरकारी सहायता नहीं मिली। खास बात तो यह है कि इस पूरे गांव में कोई नाली नहीं है और गांव के लोग बाजार से सब्जी नहीं खरीदते।
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गांव में उगी सब्जियां
- फोटो : अमर उजाला
गांव में नहीं तालाब, जल संरक्षण के साथ हरियाली का संदेश दे रही महिलाएं
सिकंदरपुर गांव की महिलाओं ने गांव में तालाब न होने के कारण आए दिन जल निकासी की समस्या से निपटने के लिए पहल की। महिलाओं ने नलों के आगे गड्ढे खोदे और पानी उसमें एकत्रित होने लगा, लेकिन यह भी नाकाफी था। इसके बाद छोटे छोटे पेड़ व बाद में सब्जियां उगानी शुरू कर दी। महिलाएं अपने आंगन में गोभी, तोरी, लौकी, कद्दू, जिमीकंद, कटहल, भिंडी, नींबू आदि की सब्जियां उगाती है।
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घर के आंगन में उगी सब्जियां उगाता किसान
- फोटो : अमर उजाला
पूरी तरह जैविक खेती से उगाई गई सब्जियों को अपने घरों में उपयोग करने के साथ बाकी सब्जियों को बेच दिया जाता है। इस तरह इस गांव की महिलाओं ने जल संरक्षण, स्वच्छता और हरियाली का संदेश दिया।
इस गांव की महिलाओं का कहना है कि उनके गांव की तरह दूसरे गांव की महिलाएं भी इस तरह किचन गार्डन बनाकर घरों से निकलने वाले पानी का सदउपयोग कर सकती है, साथ ही अपनी आय बढ़ा सकती है। जल्द इस गांव के प्रधान व सचिव को प्रदेश स्तर पर सम्मानित किया जाएगा।