अपने परिवारों को छोड़कर जो देश के लिए कुर्बान हो गए। उन वीर शहीदों को रविवार को अमर उजाला एवं पृथ्वी एंटरटेनमेंट की तरफ से आयोजित कार्यक्रम में नमन किया गया। दिल्ली रोड स्थित होटल हाइफन में एक शाम शहीदों के नाम कार्यक्रम में आपरेशन रक्षक और कारगिल में शहीद हुए रणबांकुरों के परिजनों को सम्मानित किया गया तो हर आंख नम हो गई। कार्यक्रम की शुरुआत ओज के वरिष्ठ कवि हरिओम पंवार, पूर्व सैनिक संगठन मेरठ के अध्यक्ष राजपाल सिंह, पीसी ज्वैलर्स के आकाश अग्रवाल और योद्धा मिलिट्री एकेडमी के कर्नल अमरदीप त्यागी ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। रंगशाला एकेडमी के कलाकारों ने गणेश वंदना की मनमोहक प्रस्तुति दी। देशभक्ति गीतों पर एकेडमी के कलाकारों ने एक से बढ़कर एक ऐसी शानदार प्रस्तुति दी कि हर तरफ से तालियों का शोर सुनाई देने लगा।
माहौल ऐसा कायम हो कि कोई बेटा शहीद न हो., जांबाजों के सम्मान में हर आंख हुई नम
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि फिल्म एक्टर राजपाल यादव ने कहा कि ऐसे आयोजन में अमर उजाला ने उन्हें बुलाकर जितना सम्मान दिया है, उसके बारे में वे बता नहीं सकते। राजपाल यादव ने कहा कि हम शहीदों के परिवारों के लिए खूब तालियां बजा सकते हैं, लेकिन जिंदगी की गाड़ी ऐसे नहीं चलती। जिनके घर वाले शहीद होते हैं, वे अकेले जीवन जीने को मजबूर होते हैं। हम समारोह करें न करें लेकिन उनके बच्चों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर जरूर चलें। उन्होंने कहा कि दुनिया में ऐसा माहौल कायम हो जिससे कोई शहीद ही न हो।
जान देनी पड़ेगी फिर भी वो सीमा पर जाता है
ओज के वरिष्ठ कवि डॉ. हरिओम पंवार ने कहा कि ऐसे परिवारों के बीच में सम्मिलित होना तीर्थ जैसा है, जिन्होंने अपने लाल देकर सीमा की रक्षा की है। उन्होंने कहा कि हमारे देवता ऐसे फौजी बेटे हैं, जो बंदूक पर सिर रखकर सोते हैं। हम शहीदों को कुछ नहीं दे सकते। इनकी वजह से ही आज हम सब जिंदा है। उन्होंने कहा कि एक फौजी ही है जो जानता है कि जान देनी पड़ेगी, फिर भी वो सीमा पर जाता है। डॉ. हरिओम पंवार ने करगिल शहीदों के ऊपर लिखी कविता सुनाई। उनकी कविता, मैं केशव का पांचजन्य भी गहन मौन में खोया हूं। उन बेटों की याद कहानी लिखते लिखते रोया हूं। जिस माथे की कुमकुम बिंदी वापस लौट नहीं पाई, चुटकी झुमके पायल ले गई कुर्र्बानी की यमराई। कुछ बहनों की राखी जल गई है बर्फीली माटी में, वेदी के गंठबंधन मिल गए हैं करगिल की घाटी में। पर्वत पर कितने सिंदूरी सपने दफन हुए होंगे, बीस बसंतों के मदमाती जीवन हवन हुए होंगे। कोई मोल नहीं दे सकता बासंती जज्बातों का...सुनकर हर किसी की आंख नम हो गई।
कार्यक्रम में अतिथि आरएएफ के कमांडेंट शैलेंद्र कुमार ने कहा कि शहीदों के परिवारों के लिए ऐसे आयोजनों की जरूरत है। अपनों की शाहदत पर कोई उन्हें क्या दे सकता है, लेकिन ऐसे आयोजनों से आने वाली पीढ़ी में देशभक्ति की भावना जाग्रत होती है। योद्धा एकेडमी के कर्नल अमरदीप त्यागी ने शहीद परिवार के बच्चों के लिए कोचिंग में 50 फीसदी छूट देने की बात कही।
इनको किया गया सम्मानित
अभिनेता राजपाल यादव, वरिष्ठ कवि डॉ. हरिओम पंवार और आरएएफ के कमांडेंट शैलेंद्र कुमार ने शहीदों के परिजनों को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। इनमें शहीद मेजर मनोज तलवार के भाई नवनीत तलवार, शहीद ग्रेनेडियर योगेंद्र सिंह यादव की पत्नी वीर नारी उर्मिला कुमारी, शहीद यशवीर सिंह की पत्नी वीर नारी मुनेश देवी, शहीद सत्यपाल सिंह की पत्नी वीर नारी बबीता देवी, शहीद देशपाल सिंह की बेटी आरती चौधरी, शहीद सतीश कुमार की पत्नी वीर नारी विमलेश, शहीद हरविंद्र सिंह की पत्नी वीर नारी मुनेश देवी और शहीद जुबैर अहमद की पत्नी वीर नारी इमराना खातून को सम्मानित किया गया।