एक समय मेरठ में देश के तमाम राज्यों से छात्र पढ़ने आते थे, लेकिन बीच में ये सिलसिला कम होता चला गया। उल्टा यहां के तमाम छात्र-छात्राएं दूसरे राज्यों में पढ़ने जाने लगे। कितने ही लोग तो मेरठ का नाम आते ही बोलने लगते... अच्छा क्राइम कैपिटल से हो।
UP: दिल में बस गया मेरठ, अन्य प्रदेशों से आईं बेटियां बोलीं- लोग कहते थे 'क्राइम कैपिटल' में पढ़ने न जाना
आंध्र प्रदेश में परिचितों ने कहा, मेरठ मत भेजना
आंध्र प्रदेश की रहने वाली अर्पिता को दीक्षांत समारोह में पीएचडी की डिग्री मिली। छात्रा के पिता शंकर और माता पद्मा भी समारोह में पहुंचे। कुलाधिपति को जब बताया कि वे आंध प्रदेश से हैं तो उन्होंने पूछ लिया कि इतनी दूर बेटी को पढ़ने भेज दिया। माता-पिता ने बताया कि बेटी की इच्छा थी कि वह कृषि में पीएचडी करे। वे उसकी इच्छा दबा नहीं सके। कुलाधिपति ने बाद में मंच से भी इस बात को साझा करते हुए प्रशंसा की कि अब माता-पिता बच्चों पर अपनी इच्छा नहीं थोप रहे हैं। पिता शंकर ने बताया कि अर्पिता ने आईसीएसआर की परीक्षा दी थी, जब उसका नंबर यहां आया तो परिचितों ने भेजने से मना किया, लेकिन बेटी यहां पर पढ़ने आई।
आईआईटी में हुआ दाखिला : निकिता सिंह
मूल रूप से लखनऊ की रहने वाली निकिता सिंह के लिए आज का दिन बेहद खास था। दीक्षांत समारोह में उन्हें 79 फीसदी नंबरों के साथ बीटेक बायोटेक की डिग्री मिली। उन्होंने बताया कि साथी कहते थे कि कहां जा रही है, लेकिन वह गलत थे। विवि की पढ़ाई के दम पर आज मेरा एडमिशन आईआईटी खड़गपुर में गेट के द्वारा एमटेक एग्रीकल्चर बायोटेक्नोलॉजी में हो चुका है।
मेरठ में पढ़ाई का बहुत अच्छा अनुभव रहा। ये विवि ही नहीं शहर भी बहुत अच्छा है। यहां की पढ़ाई ही अब कॅरिअर को मुकाम पर लेकर जाएगी। - अरुणिमा तिवारी, एमएससी एंटोमोलॉजी (बरेली)
जब मेरठ में एडमिशन हुआ तो सब कहते थे कि कहां जा रही हो, लेकिन यहां आने के बाद विचार बदल गए। विवि में बहुत अच्छे से पढ़ाई हुई। - प्रीति सिंह, एमएससी एग्रोनॉमी (आगरा)
डिग्री मिलने की बहुत खुशी है। विवि में बहुत कुछ सीखा। शहर बहुत अच्छा है। यहां क्रांति के बारे में जानने को मिला। -पूजा सिंह, एमएससी एग्रोनॉमी (बांदा)
पढ़ाई का अच्छा अनुभव रहा। कभी ऐसा नहीं लगा कि घर से इतनी दूर पढ़ाई कर रहे हैं। माहौल अच्छा था। -अर्पणा वर्मा, एमएससी एग्रोनॉमी (लखीमपुर खीरी)