उत्तर प्रदेश में कानपुर जिले के चौबेपुर थाना क्षेत्र के बिकरू गांव में पुलिसकर्मियों पर गोलियां बरसाने वाला हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे 14 साल पहले सहारनपुर में गिरफ्तार हुआ था। पुलिस ने तब उसके पास से मादक पदार्थ बरामद करते हुए उसके खिलाफ नारकोटिक्स एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया था लेकिन हुई थी ये बड़ी चूक और फिर उठे थे कई सवाल, आगे जानिए पूरा अपडेट...
14 साल पहले हुई थी ये बड़ी चूक, उठे थे कई सवाल, फिर हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे को ऐसे मिल गई थी जमानत
यह बात वर्ष 2006 की है। जनकपुरी थाना पुलिस ने एसबीडी जिला अस्पताल के चौराहे के पास से 25 जून 2006 को विकास दुबे को गिरफ्तार किया था। उसके पास से पांच किलो डोडा पोस्त बरामद हुआ था। उस समय अमिताभ यश सहारनपुर एसएसपी थे, जो अब एसटीएफ में हैं। जनकपुरी थाने पर विकास दुबे से एसएसपी ने पूछताछ की थी। तब उसकी लंबी आपराधिक लिस्ट सामने आई थी। उस समय भी विकास पर करीब 50 मुकदमे दर्ज थे।
यह भी पता चला कि विकास दुबे ने गिरफ्तारी से पहले देवबंद क्षेत्र में अपने एक परिचित के यहां शरण ली थी। उस मामले में अधिवक्ता नीरज तिवारी ने विकास दुबे की जमानत के लिए पैरवी की थी। पुलिस ने विवेचना पूरी करने के उपरांत अगस्त 2006 में चार्जशीट न्यायालय में दाखिल कर दी थी। अधिवक्ता नीरज तिवारी ने बताया कि विकास दुबे की जमानत हमने कराई थी, लेकिन उसके बाद मुकदमे में क्या हुआ, उन्हें पता नहीं है।
एंबुलेंस से कोर्ट ले जाने पर उठे थे सवाल
विकास दुबे को पुलिस ने जब गिरफ्तार किया था तो उसकी रीढ़ में दिक्कत बताई गई थी। उसे एंबुलेंस से कोर्ट ले जाया गया था। तब उसकी गिरफ्तारी पर सवाल भी उठे थे। क्योंकि जो शातिर हिस्ट्रीशीटर ठीक से चल भी नहीं पा रहा था, उससे पांच किलो डोडा पोस्त बरामद दिखाया था। पुलिस की इसी गलती का फायदा आरोपी विकास दुबे ने उठाया और उसे जमानत मिल गई थी।
देवबंद में रहकर मुजफ्फरनगर में कराया था इलाज
विकास दुबे को 2006 में जब सहारनपुर के जनकपुरी थाना पुलिस ने गिरफ्तार किया था, तब वह पांच हजार का इनामी था और देवबंद में अपने एक रिश्तेदार के यहां रहकर मुजफ्फरनगर के चिकित्सक से इलाज करा रहा था। कानपुर के चौबपुर क्षेत्र स्थित गांव बिकरू निवासी विकास दुबे उस समय जिला पंचायत सदस्य था। राजनाथ सरकार में मंत्री रहे संतोष शुक्ला की हत्या के मामले में नाम आने पर विकास दुबे पर 50 हजार का इनाम घोषित हुआ था। हालांकि उस मामले में वह अदालत से बरी हो गया था, जब उसको सहारनपुर से गिरफ्तार किया गया, उससे चार महीना पूर्व महाबालेश्वर जाते समय कार की स्टेयरिंग फेल होने पर दुर्घटना में वह गंभीर रूप से घायल हो गया था।