मेरठ शहर के प्रमुख बाजारों में सर्जिकल मास्क के नाम पर कपड़े के मास्क बेचे जा रहे हैं। कोरोना के खौफ के बीच मास्क की उपलब्धता में कमी आने पर कुछ व्यापारियों ने घरों में मास्क बनवाकर उसका कारोबार शुरू कर दिया है। कपड़े के मास्क 100 से 150 रुपये में बेच मोटा मुनाफा कमाया जा रहा है।
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मास्क बनाती महिलाएं
- फोटो : अमर उजाला
शहर के श्यामनगर, किदवई नगर और लिसाड़ी क्षेत्र में घर- घर में महिलाएं ऑर्डर पर कपड़े के मास्क तैयार कर रही हैं। प्रति मास्क उन्हें दस रुपये दिए जाते हैं। शहर के वैली बाजार, लालकुर्ती, सदर, नई सड़क आदि बाजारों में दुकानों पर ये मास्क बिक रहे हैं। कोटला बाजार के कुछ व्यापारी इन महिलाओं से ऑर्डर पर मास्क बनवा रहे हैं। कपड़ों के इन मास्क में न तो मानकों का ध्यान रखा जा रहा है, न ही सैनिटाइजेशन का। ऐसे में ये मास्क कोरोना से ज्यादा खतरनाक हैं।
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कपड़े के मास्क
- फोटो : अमर उजाला
एन 95 या एन 99 ही कारगर
मानकविहीन मास्क लगाने का फायदा कम नुकसान ज्यादा है। साधारण मास्क हवा को छानता तक नहीं है। ऐसे में शरीर से निकली गंदी हवा वापस सांस में घुलकर अंदर चली जाती है। डाक्टरों के अनुसार एन 95 और एन 99 मास्क ही प्रदूषण आदि श्वास संबंधी बीमारियों से बचाव के लिए कारगर हैं।
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मास्क बनाती महिला
- फोटो : अमर उजाला
शहर में एन 95 की किल्लत
शहर में एन 95 और एन 99 मास्क की भारी किल्लत है। भारी मांग के चलते अब यूज एंड थ्रो मास्क भी तीन गुना ज्यादा दाम में बेचे जा रहे हैं। शहर के दवा बाजार खैरनगर में भी एन 95 और एन 99 मास्क उपलब्ध नहीं हैं। कुछ व्यापारी इन मास्क का स्टॉक तीन से चार गुना दाम पर बेच रहे हैं।
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