मेरठ में लाला लाजपत राय मेडिकल कॉलेज में दोस्त के बर्थ डे का केक काटने के बाद 12 एमबीबीएस छात्र तीन कारों में सवार होकर निकले तो रास्ते में बेकाबू रफ्तार ने दो की जान ले ली। जिस होंडा सिटी में अक्षांश, दिव्यांश, आदिश और आशीष सवार थे वह साकेत पेट्रोल पंप के सामने बेकाबू हो गई। पुलिस के मुताबिक कार गलत दिशा में चल रही थी और रफ्तार भी 150 रही होगी। पुलिस ने पेट्रोल पंप से सीसीटीवी फुटेज ली है। फोरेंसिक टीम ने भी जांच की है।
केक काटना पड़ा महंगा: होंडा सिटी कार की बेकाबू हुई रफ्तार, हादसे में गई दो छात्रों की जान, मातम में बदलीं बर्थडे की खुशियां
पेट्रोल पंप से टकरा जाती कार तो होता बड़ा हादसा
क्षतिग्रस्त कार देखने के लिए दिनभर घटनास्थल पर लोगों का तांता लगा रहा। पुलिस ने बताया कि जांच के बाद गाड़ी को थाने लाया जाएगा। पेट्रोल पंप कर्मचारी बता रहे थे कि गनीमत रही कि गाड़ी पंप से नहीं टकराई, अन्यथा और भी बड़ा हादसा हो सकता था।
कार हुई चकनाचूर
पुलिस का कहना है कि गाड़ी की स्पीड ज्यादा होने के चलते वह कंट्रोल नहीं हुई और फिर पेट्रोल पंप में घुस गई। दूसरे खंभे में टकराने के बाद गाड़ी घूमती हुई पेट्रोल पंप की चाहरदीवारी में जा घुसी। बताया है कि गाड़ी का पहले पिछला हिस्सा लगा और फिर आगे से दीवार में घुसी, जिसमें गाड़ी पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई। फोरेंसिक टीम ने बताया कि गाड़ी चला रहे आशीष ने सीट बेल्ट लगा रखी थी।
गलत दिशा में चल रही थी होंडा सिटी
एमबीबीएस के एक छात्र ने बताया कि होंडा सिटी में पेट्रोल कम था। पेट्रोल पंप पर जाने के लिए विपरीत दिशा में जाना पड़ा। तभी गाड़ी का संतुलन बिगड़ गया और हादसा हो गया। उधर पुलिस का भी दावा है कि गाड़ी विपरीत दिशा में थी। वहीं दिव्यांश के पिता डॉ. रामानंद का कहना है कि वह वापस मेडिकल की तरफ जा रहे थे इसी दौरान उनकी गाड़ी में पीछे से दूसरी गाड़ी ने टक्कर मारी जिसकी वजह से होंडा सिटी का संतुलन बिगड़ा और हादसा हो गया। जबकि एसपी सिटी ने बताया कि कोई दूसरी गाड़ी फुटेज में नहीं दिखी।
कंकरखेड़ा में दिव्यांश आनंद का अंतिम संस्कार, रो पड़ा रामनगर
एमबीबीएस छात्र दिव्यांश आनंद की मौत की जानकारी मिलते ही कंकरखेड़ा की रामनगर कॉलोनी में मातम छा गया। शाम को दिव्यांश का अंतिम संस्कार कंकरखेड़ा स्थित श्मशान घाट में हुआ। मुखाग्नि तहेरे भाई कुमार आनंद ने दी। अंतिम संस्कार में न्यायिक मजिस्ट्रेट, डॉक्टर, शिक्षक, एमबीबीएस के छात्र और लिसाड़ी के ग्रामीणों समेत बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे। परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। दिव्यांश पिता डॉ. रामानंद और मां मंजू कई बार बेहोश हुए।