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'रावण' की रिहाई पर भाजपा का दांव फेल! ये है पश्चिम का दलित-मुस्लिम समीकरण

Sat, 15 Sep 2018 09:35 PM IST
एम. रियाज़ हाशमी, अमर उजाला, मेरठ
एम. रियाज़ हाशमी, अमर उजाला, मेरठ Updated Sat, 15 Sep 2018 09:35 PM IST
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BJP's plan failed on release of Chandrashekhar Ravan, and Dalit Muslim equation in the West
सीएम योगी और चंद्रशेखर रावण

चंद्रशेखर रावण की रिहाई की मंशा के पीछे राज्य सरकार का जो भी मकसद रहा हो लेकिन पहले ही दिन एक बात साफ हो गई है कि भीम आर्मी पूरी तरह से भाजपा के खिलाफ ताल ठोक रही है।

BJP's plan failed on release of Chandrashekhar Ravan, and Dalit Muslim equation in the West
चंद्रशेखर उर्फ रावण - फोटो : अमर उजाला

रावण ने भाजपा की उन संभावनाओं को भी खारिज कर दिया है कि सरकार के फैसले से दलित-मुस्लिम केमिस्ट्री प्रभावित होगी। रिहाई के बाद चंद्रशेखर ने कांग्रेस विधायकों को गले लगाया और इमरान मसूद के लिए खून देने से भी पीछे न हटने का ऐलान कर अपने सियासी रुख को साफ कर दिया है।

BJP's plan failed on release of Chandrashekhar Ravan, and Dalit Muslim equation in the West
चंद्रशेखर उर्फ रावण - फोटो : अमर उजाला

शुक्रवार की दोपहर सहारनपुर के छुटमलपुर में अपने आवास पर पहुंचे प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष इमरान मसूद, कांग्रेस विधायक मसूद अख्तर और नरेश सैनी को रावण ने बाकायदा गले लगाया। कहा, इमरान ने मेरा साथ दिया। ये किसी पार्टी में रहें, हम इनके लिए खून दे भी सकते हैं और ले भी सकते हैं। क्योंकि ये बहुजन वर्ग के उस मिशन को आगे बढ़ा रहे हैं जिसकी जरूरत है। इनके वर्ग ने हमेशा दलित समाज को सुरक्षित करने का काम किया।

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BJP's plan failed on release of Chandrashekhar Ravan, and Dalit Muslim equation in the West
रावण के गांव में दलितों का जश्न - फोटो : अमर उजाला

'अमर उजाला' के पास यह वीडियो सुरक्षित है जिसमें चंद्रशेखर अपने समाज को ये संदेश दे रहे हैं। दोनों कांग्रेस विधायकों से गले मिल रहे हैं और अंत में रामपुर मनिहारान की चेयरमैन शकुंतला देवी के पुत्र विवेककांत को गले लगाकर कह रहे हैं कि उनके पिता पूर्व सांसद जगपाल सिंह मेरे राजनीतिक गुरू रहे हैं और यह हमारा खून है। जगपाल सिंह दो बार हरिद्वार से सांसद रहे हैं। 1984 में उन्होंने लोकदल उम्मीदवार के रूप में मायावती को हराया था और 1989 में कांग्रेस के टिकट पर सांसद बने थे।

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चंद्रशेखर उर्फ रावण - फोटो : अमर उजाला

अंतिम चुनाव उन्होंने 2007 में भाजपा के टिकट पर उसी हरौड़ा क्षेत्र से लड़ा था जहां से मायावती दो बार मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंची हालांकि भीम आर्मी को गैर राजनीतिक संगठन बताते हुए उन्होंने यह भी साफ कर दिया कि हम दलित समाज को भाजपा के खिलाफ वोट की ताकत इस्तेमाल करने के लिए तैयार करेंगे। माना जा रहा था कि सीएम आदित्यनाथ योगी ने 48 दिन पहले रासुका में निरुद्ध चंद्रशेखर को रिहा करके दलितों के रुख को नरम करने का दांव चला है, लेकिन पहले ही दिन इस पर स्थिति साफ हो गई। साथ ही उन्होंने मायावती या बसपा को लेकर भले ही कोई टिप्पणी नहीं की। चंद्रशेखर को इस बात का पता है कि उनका संदेश पश्चिमी उत्तर प्रदेश और देश की दूसरी दलित बाहुल्य सीटों पर किसे नफा-नुकसान पहुंचाएगा। समीकरणों पर निगाह डाले तो वेस्ट यूपी की कुछ सीटों पर दलित मुस्लिम गठजोड़ प्रभावी रहता है।

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