मेरठ में नगर निगम सदन में शनिवार को बहस के बीच शुरू हुआ विवाद मारपीट के साथ सड़क तक पहुंच गया। सदन से देहलीगेट थाने तक सात घंटे अराजकता का माहौल रहा। पुलिस की मौजूदगी में सपा-बसपा के पार्षदों की पिटाई का वीडियो वायरल होने के बाद मामला और गरमा गया। विपक्षी दलों ने भाजपा नेताओं के खिलाफ आंदोलन का एलान कर दिया।
वहीं, देर रात तक विपक्षी दलों ने बैठक कर राज्यमंत्री और एमएलसी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी। आरोप लगाया कि पुलिस दोनों पार्षदों को पकड़ कर खड़ी रही और भाजपा नेता उनको पीटते रहे।
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पिटाई करते भाजपा नेता।
- फोटो : अमर उजाला
निगम की बोर्ड बैठक में एमएलसी धर्मेंद्र भारद्वाज और बसपा पार्षद आशीष चौधरी के बीच थप्पड़बाजी के बाद गुंडागर्दी का माहौल बन गया। पहले बसपा पार्षद आशीष और फिर सपा पार्षद कीर्ति घोपला पर भाजपा नेताओं ने हमला बोल दिया। पार्षद बचाव-बचाव चिल्लाते रहे और भाजपा नेता पुलिस की मौजूदगी में उनको पीटते रहे। सदन से सड़क और फिर थाने तक दोनों पार्षदों को बेहरमी से पीटा गया।
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मेरठ में पार्षदों को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा।
- फोटो : अमर उजाला
उधर, लोगों ने वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। वीडियो में राज्यमंत्री सोमेंद्र तोमर और भाजपा एमएलसी धर्मेंद्र भारद्वाज सहित भाजपा कार्यकर्ता दोनों पार्षदों को पीटते दिखाई दे रहे हैं। वायरल वीडियो को देखकर पार्षदों के पक्ष में 500 से ज्यादा लोग थाने पहुंच गए। विपक्षी पार्षद और उनके समर्थकों ने भाजपा नेता व उनके कार्यकर्ताओं के खिलाफ नारेबाजी की। सपा विधायक अतुल प्रधान के थाने पहुंचने पर विपक्षी दलों ने एक साथ भाजपा नेताओं के खिलाफ मोर्चा खोलने का एलान किया।
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नगर निगम बोर्ड बैठक में बवाल
- फोटो : Amar Ujala
ऐसी मची भगदड़ कि रूट डायवर्जन करना पड़ा
घंटाघर से देहलीगेट तक पार्षदों की पिटाई के दौरान भगदड़ मच गई। फल-सब्जी के तीन ठेले पलटा दिए गए। माहौल गरमाया तो पुलिस को घंटाघर और केसरगंज पुलिस चौकी से रूट डायवर्जन करना पड़ा। केसरगंज से देहलीगेट होते घंटाघर का मार्ग एक घंटे बंद रहा।
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सरधना विधायक अतुल प्रधान
- फोटो : Amar Ujala
थाने में फूट-फूटकर रोए पार्षद, कहा-जनता की आवाज उठाना गुनाह हो गया, चोर-लुटेरों की तरह पीट रहे थे मंत्री-एमएलसी
देहलीगेट थाने में पार्षद कीर्ति घोपला और पार्षद आशीष चौधरी अपने समर्थकों के सामने फूट-फूटकर रोने लगे। बोले कि चोर-लुटेरों की तरह मंत्री-एमएलसी और उनके कार्यकर्ता पुलिस की मौजूदगी में हमें पीटते रहे। लोग वीडियो बना रहे थे, लेकिन किसी ने उन्हें बचाने की जहमत नहीं उठाई। सदन में सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। मारपीट किसने शुरू की, इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। इंसाफ नहीं मिला तो वह समाज के लोगों के बीच जाएंगे। क्षेत्र के लोगों की आवाज उठाना सदन में गुनाह है क्या? आशीष ने कहा कि अनुसूचित जाति के पार्षदों को सदन में बोलने तक नहीं दिया जा रहा है।