प्रकृति का संतुलन बनाए रखने के लिए हर जीव की अपनी भूमिका है। ऐसा ही एक स्तनधारी उड़ने वाला जीव है चमगादड़। चमगादड़ एक ऐसा प्राणी है जिसे इंसानों के आस पास के इलाकों में रहना पसंद होता है। ये दो तरह के होते हैं। एक वे जो फल-फूल खाते हैं और पेड़ो पर रहते हैं। ये आकार में काफी बड़े होते हैं। इन्हें मेगा किरोप्टेरा, फ्लाइंग फॉक्स या फ्रूट बैट कहा जाता है। दूसरे कीट भक्षी छोटे चमगादड़ होते हैं। इनको माइक्रो किरोप्टेरा कहते हैं। ये घरों, पुराने खंडहरों, गुफाओं आदि में रहते हैं। वाइल्ड लाइफ साइंटिस्ट फ्लाइंग फॉक्स को 'जंगल का किसान' भी कहते हैं। चमगादड़ के बारे में आपने यूं तो ढेरों बातें सुनी और पढ़ी होंगी लेकिन आज हम आपको चमगादड़ों से जुड़ी कुछ ऐसी चीजों के बारे में बता रहे हैं जिनके बारे में आप शायद ही जानते होंगे।
एक घंटे में खा सकते हैं 600 खटमल, क्या चमगादड़ से जुड़ी ये रोचक बातें जानते हैं आप
वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट का मानना है कि बढ़ते प्रदूषण के बीच पॉश इलाकों में पेड़ों की अधिकता चमगादड़ों को पसंद आ रही है। मेरठ शहर के सिविल लाइन से माइग्रेट करने वाले फ्लाइंग फॉक्स (चमगादड़) फिर से अपने बसेरों पर लौट आए हैं। एसएसपी आवास, कमिश्नरी कार्यालय और सिंचाई विभाग कॉलोनी के पेड़ों पर दिनभर ये उलटे लटके नजर आते हैं। जंगल के किसान कहे जाने वाले ये चमगादड़ अंधेरा होते ही अपने भोजन की तलाश में निकल पड़ते हैं।
फिर से बनाया बसेरा
सिविल लाइन इलाके में पेड़ों की अच्छी संख्या है। सालों पहले तक यहां के पेड़ों पर फ्लाइंग फॉक्स रहते थे। वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट का मानना है कि प्रदूषण या दूसरी वजहों से हजारों चमगादड़ यहां से माइग्रेट कर गए। लेकिन खुशी की बात है कि ये फिर से लौट आए हैं। एसएसपी आवास और सिंचाई विभाग कालोनी में लगे पेड़ों पर यह सैकड़ों की संख्या में नजर आते हैं। सिविल लाइन के अलावा कैंट में भी पुराने पेड़ों पर फ्लाइंग फॉक्स देखे जा सकते हैं। डीएफओ अदिति शर्मा बताती हैं कि सिविल लाइन इलाके में काफी हरियाली है। बंगलों में फलों वाले पेड़ भी हैं। इस कारण फ्रूट बैट को ये जगह लुभा रही है।
अशुभ नहीं ये मित्र हैं
सीनियर ऑर्नीथोलोजिस्ट डॉ. रजत भार्गव बताते हैं कि चमगादड़ को अशुभ माना जाता है। लोगों की धारणा है कि ये आक्रामक होते हैं। लेकिन ये अंधविश्वास है। चमगादड़ इंसान का मित्र है। वजह, ये फल और फूलों को खाने के बाद उनके परागकणों के संचरण का काम भी करते हैं। इससे जंगल में नए पौधे तैयार होते हैं। वैज्ञानिक मानते हैं कि उष्ण कटिबंधीय वर्षा वनों का बड़ा वनीकरण चमगादड़ों द्वारा फैलाए गए बीजों से ही हुआ है। फ्लाइंग फॉक्स जहां फल और फूलों के पौधों के रोपण आदि में जहां हमारी सहायता करते हैं, वहीं माइक्रो किरोप्टेरा हानिकारक कीट-पतंगों, चूहों आदि को नियंत्रित करने में मददगार हैं। दक्षिण अमेरिका के उष्णकटिबंधीय वनों में चमगादड़ की कुछ प्रजातियों को छोड़कर बाकी सभी प्रजातियां इंसान के मित्र हैं।
चमगादड़ों के बारे में कुछ रोचक बातें
1100 प्रजाति के होते हैं चमगादड़ दुनियाभर में
2.5 ग्राम वजन का होता है दुनिया का सबसे छोटा चमगादड़।
इसका नाम बंबलीबी है, यह थाईलैंड में पाया जाता है।
एक चमगादड़ एक घंटे में 600 खटमल तक खा सकता है।